मेड इन कुमाऊं, आखिर कब बनेगा मेक इन इंडिया?
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आज मोदी का ‘मेक इन इंडिया’ बजट पेश हुआ। राज्य सरकारों को इसकी प्रतीक्षा होती है, ये जानने को कि उनको कितनी धनराशि मिली। सवाल ये है कि हमने अपना क्या विकास किया, सिवाय खनन, जंगल और वन्य जीवन के।
अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नैनीताल, मसूरी के अलावा तीसरा पयर्टन स्थल भी विकसित नहीं कर पाए। इस खबर में हम आपसे उन संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं जो राज्य की दशा-दिशा बदल सकती थीं। उन लोगों के बारे में भी बता रहे हैं, जिन्होंने अपने बूते उद्यमों के नए आयाम खोले।
आलू
अपने खास स्वाद के लिए देश भर में मशहूर पहाड़ी आलू इस बार पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले में करीब 137980 क्विंटल हुआ है। मुनस्यारी, चंपावत, लोहाघाट, खेतीखान आदि क्षेत्रों में काश्तकार जैविक आलू का उत्पादन करते हैं। इसके बावजूद पहाड़ से लेकर हल्द्वानी तक आलू को स्टोर करने के लिए एक भी व्यवस्थित कोल्ड स्टोर नहीं है। न तो कोई खास मंडी है और न ही इसके बाइप्रोडक्ट बनाने के लिए कोई संयंत्र लगा है। बरेली के कोल्ड स्टोर में आलू स्टोर करने की मजबूरी सरकारी तंत्र की उदासीनता को जाहिर करता है।
अदरक
आलू की तरह पहाड़ का अदरक भी अपने स्वाद के लिए मशहूर है। चारों पर्वतीय जिले में हर साल 18580 क्विंटल अदरक होता है। बस कुछ प्रगतिशील किसान ज्यादा उत्पादन कर अपने बूते इसे बाजार तक पहुंचा रहे हैं। सरकार को अदरक का बीज देना होता है और वह भी समय पर नहीं मिल पाता।
...जो नहीं बन सके मेक इन इंडिया
गहत
किडनी में पत्थर तोड़ने के लिए इसे रामबाण माना जाता है। दूर बंबई तक इसकी मांग है। चारों पहाड़ी जिले में हर साल करीब 69270 क्विंटल गहत पैदा हुआ है। बाजार में यह 100 से 120 रुपए किलो बिकता है।
राजमा
पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी के बोना, गोल्फा, बोगड्यार, मदकोट, सेबिला, धारचूला के गो घाटी बगड़ में राजमा पैदा होती है। राज्य में मुनस्यारी और मिलम का राजमा भारी डिमांड में है। बेहद स्वादिस्ट इस राजमा में प्रचुर प्रोटीन होता है। राज्य में करीब 6500 क्विंटल राजमा होता है।
नाशपाती
कुमाऊं भर में 75461 मीट्रिक टन नाशपाती होती है। पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम फलों को खरीदकर भोजीपुरा शराब फैक्ट्री को बेचती थी। अब निगम फलों को नहीं खरीदती। सिर्फ पिथौरागढ़ जिले में नाशपाती के 10 हजार पेड़ हैं। चंपावत जिले में कुल 434.41 हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती की खेती होती है।
बुरांश
दिल को ताकत पहुंचाने वाले बुरांश के पहाड़ में जंगल है। पिथौरागढ़ जिले में हर साल 17000 लीटर बुरांश का जूस तैयार होता है। बुरांश का जूस बनाने का काम निजी तौर पर ही लोग करते हैं। उद्यान विभाग की फल प्रसंस्करण इकाई भी थोड़ा बहुत जूस तैयार करती है। भीमताल में फ्रुटेज और कुछ अन्य निजी उद्यमी इसका जूस बनाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक कुल क्षमता का एक प्रतिशत दोहन हो रहा है।
यारसागंबू
पिथौरागढ़ जिले में यारसा गंबू की निकासी तो होती है, लेकिन इसका कोई रिकार्ड नहीं मिलता। वर्ष 2013 में कुमाऊं मंडल विकास निगम ने मुनस्यारी की वन पंचायतों की ओर से संग्रह किए गए 12 किलोग्राम यारसा गंबू को खरीदा था। अब निगम यारसा गंबू नहीं खरीदता। दुनिया भर में सोने के भाव बिकने वाली इस जड़ी की कोई व्यवस्थित मार्केटिंग नहीं है।
पिरूल
बेड़ीनाग के त्रिपुरादेवी में अवनी संस्था ने पिरूल से 120 किलोवाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य रखा है। मई में इसका उत्पादन शुरू होगा। उत्पादित बिजली पावर कारपोरेशन को दी जाएगी। अवनी वाले बेहतरीन सिल्क भी बनाते हैं जो विदेश्ा जाती है।
..जो मेक इन इंडिया बने अपने बूते
कुमाऊं में इन प्रमुख फलों का उत्पादन
पश्मीना ऊन
अल्मोड़ा की जनजागरण समिति की संचालिका और समाजसेविका मुक्ति दत्ता ने 1998 में पंचाचूली वीमन वीवर्स की स्थापना की। उसके बाद 2001 में उन्होंने ऊन कातने और पश्मीना ऊन से शाल, स्वेटर, कंबल आदि बनाने का कारखाना लगाया। उन्होंने करीब 300 महिलाओं को रोजगार दिया है। मुक्ति दत्ता ने अपने प्रयासों से इंग्लैंड, अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित यूरोप के कई देशों में यहां के बने सामान की मार्केट विकसित की।
कैमोमाइल टी
अल्मोड़ा की कैमोमाइल मेडिसनल टी (चाय) की कीमत 2000 रुपए प्रति किलो है। इस वनस्पति का उत्पादन हिमालय क्रॉपफील्ड मूसाबंगर जिला नैनीताल के अलावा रानीखेत में एक संस्था कर रही है। यह चाय उत्तराखंड के अलावा राज्य के बाहरी क्षेत्रों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध है। इसे चाय में मिलाने चाय का स्वाद काफी अच्छा हो जाता है। यूरोप में इसे काफी पिया जाता है।
बिच्छू घास
अल्मोड़ा के चितई में स्थित आर्गेनिक कंपनी बिच्छू घास की चाय बना रही है। इस चाय का 50 ग्राम का एक पैकेट 110 रुपए में बिकता है। यह स्पेशल चाय 2200 रुपए किलो बिक रही है। इस चाय में प्रोटीन, कार्बोहाइट्रेट, इनर्जी, विटामिन-ए, कैल्शियम कई अन्य मिनरल्स और विटामिन मौजूद हैं। इस चाय की देश के बड़े शहरों में काफी डिमांड है।
उत्तरांचल-टी
कौसानी में उत्पादित उत्तरांचल-टी काफी प्रसिद्ध है। उत्तराखंड चाय बोर्ड कौसानी के अलावा घोड़ाखाल, नौटी (चंपावत) में करीब 30 हजार किलो चाय का उत्पादन कर रहा है। चाय बोर्ड अल्मोड़ा, नैनीताल और चारधाम मार्ग में चाय को बेचता है। कोलकाता स्थित आक्सन मार्केट में चाय बिक्री के लिए भेजी जाती है। जैविक चाय का बाजार मूल्य 400 से 1200 रुपए और अजैविक चाय 100 रुपये से 400 रुपए किलो के हिसाब से बिकती है। यहां ग्रीन टी भी मिलती है।
शहद
रामनगर में बिना किसी सरकारी सहायता के शहद कारोबार फल फूल रहा है। शहर के कारोबारी दिनेश महरोत्रा ने बताया कि वह कुमाऊं हनी के नाम से अपना उत्पादन करने के साथ ही डाबर, हमदर्द एवं अन्यों को भी राज्य का शुद्ध शहद देते हैं। शुद्धता के चलते उनके शहद की बड़ी मांग है। श्री महरोत्रा ने बताया कि वह प्रतिवर्ष लगभग पांच हजार क्विंटल शहद बेचते हैं।
एप्रीकाट ऑयल
खुबानी की गुठली के बीज का तेल मुक्तेश्वर के तीन उद्यमी बनाते हैं। फ्रूटेज के संजू अनुसार झागाें, झुर्रियों और जोड़ दर्द के लिए फायदेमंद इस तेल को बड़ी कंपनियां कुछ बूंद प्रयोग करती हैं। करीब एक करोड़ के इस कारोबार को लोगों ने अपने आप विकसित किया है।
मसाले
काशीपुर के मिडास फूड्स के मसालों का नामचीन पिज्जा चेन्स से लेकर एयरलाइंस की कैटरिंग में भी बेकरी प्रोडक्ट और मसालों का उपयोग किया जाता है। बड़े पैमाने पर यहां तैयार बेकरी प्रोडक्ट और मसाले निर्यात भी होते हैं। मिडास फूड्स के एमडी सुरजीत सिंह नरुला ने बताया कि यहां स्थित फैक्ट्री में इन्हें तैयार किया जाता है। इसे मैकडोनाल्ड, डॉमिनोज, पिज्जा हट जैसे नामचीन पिज्जा चेन्स को सप्लाई किया जाता है।
- सेब 48636 मीट्रिक टन
- आड़ू-33996 मीट्रिक टन
- खुबानी -22143 मीट्रिक टन
- पुलम- 27344 मीट्रिक टन
- अखरोट- 9951 मीट्रिक टन।
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