फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand Pond and lake Will disgorge pearl

उत्तराखंड के तालाब और झील उगलेंगे ये नायाब खजाना, दून पहुंचे इस वैज्ञानिक ने किया खुलासा

Wed, 22 Nov 2017 07:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 22 Nov 2017 07:48 AM IST
विज्ञापन
Uttarakhand Pond and lake Will disgorge pearl
pearl
उत्तराखंड के तालाब और झीलों से ये नायाब खजाना निकलेगा। इसका खुलासा दून पहुंचे इस वैज्ञानिक ने किया।
विज्ञापन


अब उत्तराखंड के तालाब और झील मोती उगलेंगे साथ ही इनका प्रदूषण भी कम किया जा सकेगा। समुद्री मोतियों के विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर ने देहरादून पहुंचकर इसकी संभावनाएं तलाशी हैं।

दून में फ्रेश वाटर पर्ल कल्चर की संभावनाएं तलाशने आए सोनकर प्रदेश के तालाब और झीलों में तकनीक के जरिए मोतियों के उत्पादन की योजना बना रहे हैं।

डॉ. सोनकर ने कहा कि फ्रेश वाटर पर्ल कल्चर (सीप से मोती बनाना) से पानी को साफ  करने के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। विदेशों में भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जल के तल में पाए जाने वाली विभिन्न प्रजाति की सीप सारा जीवन पानी के प्रदूषण को समाप्त करने के लिए सतत क्रिया करते रहती हैं।
विज्ञापन


एक सीपों की कॉलोनी 30 से 100 मिलियन गैलन पानी को प्रतिदिन प्रदूषण मुक्त करती है। फ्रे श वाटर कल्चर, पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। डॉ. सोनकर ने बताया कि भारत का मोती बाजार चीनी बाजार से प्रभावित है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

चीनी लोग जानवरों को लेकर बेहद क्रूर, मोती मिलने के बार मार देते है सीप को

Uttarakhand Pond and lake Will disgorge pearl
ajay sonkar

डॉ. सोनकर ने बताया कि भारतीय मसल्स (सीप) छोटी होती हैं। जबकि, चीनी मसल्स बड़ी होती हैं और एक बार में इससे 50 मोती बनाए जाते हैं। भारतीय सीप से हम एक बार में केवल एक मोती बना सकते हैं।

सीप को कोई नुकसान न हो इसके लिए सावधानी बरतनी होती है। चीनी लोग जानवरों के प्रति बेहद क्रूर होते हैं। मोती मिलने के बाद वे सीप को मार देते हैं। लेकिन हमारी तकनीक में सीप की मौत नहीं होती, बल्कि एक सीप अपने जीवन में कई बार मोती बना सकता है।

यह होती है सीप से मोती बनाने की प्रक्रिया
सबसे पहले सीप में जीन सिक्रेशन तैयार किया जाता है। इसके बाद सीप में मोती निर्माण शुरू होता है। सीप का ऑपरेशन कर फ ॉरेन बॉडी डालने के लिए कैल्शियम कार्बोनेट की परत बनाई जाती है। जिस आकार की बॉडी डाली जाती है, उसी आकार का मोती बनता है।

सीप की उम्र तीन साल होने पर उसमें मोती तैयार होता है। सीप की अधिकतम आयु छह साल होती है। सीप की खेती शुरू करने से पहले किसान को हर सीप में शल्य क्रिया करके उसके अंदर छोटा सा नाभिक या ऊतक रखना होता है। फि र सीप को बंद कर दिया जाता है।

ऊतक से निकलने वाला पदार्थ नाभिक के चारों ओर जमने लगता है और अंत में मोती का रूप ले लेता है। इसके बाद सीप को खोलकर मोती निकाल लिया जाता है और उसका उपचार कर दिया जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed