दिल्ली के सियासी समर में उत्तराखंड ने मांगी हिस्सेदारी
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दिल्ली की सियासत और विधानसभा चुनाव में सीटों की हिस्सेदारी को लेकर उत्तराखंड के लोगों ने रविवार को जंतर-मंतर पर महापंचायत की। इस दौरान राजनैतिक पार्टियों को इशारा किया गया कि हिस्सेदारी देने वाली पार्टी को ही समर्थन दिया जाएगा।
उत्तराखंडियों की हुंकार का कांग्रेस ने समर्थन दिया है। कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड एकता मंच और अन्य संस्थाओं ने किया था। महापंचायत में दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड मूल के हजारों लोग जुटे। लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, हीरा सिंह राणा व बल्ली सिंह चीमा ने अपनी जोशीली आवाज से मौजूद लोगों का जोश बनाए रखा।
वक्ताओं ने दिल्ली की राजनैतिक पार्टियों पर उत्तराखंडियों के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि कभी भी सीटों या पदों में हिस्सेदारी नहीं दी। आगामी चुनावों में ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। उत्तराखंडियों ने राजनीति और सीटों में अपनी हिस्सेदारी की मांग से कांग्रेस, भाजपा और ‘आप’ को अवगत करा दिया है।
मांग है कि राजधानी में उनकी संख्या के हिसाब से सीटों और पदों में हिस्सेदारी दें। महापंचायत के आयोजक और उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली के संयोजक सीबी टमटा ने कहा कि जो राजनीतिक दल अपने यहां से जुड़े कार्यकर्ताओं को टिकट देगा उसे सहयोग किया जाएगा।
18.5 लाख उत्तराखंडी बदल सकते हैं सियासी गणित
धीरज बेनीवाल/ नई दिल्ली
दिल्ली में रहने वाले उत्तराखंड मूल के करीब 35 लाख लोगों में से 18.5 लाख मतदाता हैं। राजनैतिक पार्टियों के लिए यह बड़ा वोट बैंक है जो आगामी विधानसभा चुनाव में सियासी गणित को बदल सकता है।
कोई भी पार्टी उत्तराखंड के लोगों की अनदेखी नहीं करना चाहेगी। सभी की नजर 18 लाख वोटों पर होगी। उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक दिल्ली के सह-संयोजक डॉक्टर विनोद बच्छेती ने बताया कि हम लोग किसी भी पार्टी का खेल बना या बिगाड़ सकते हैं।
पार्टियों ने मिलाया सुर में सुर
राजनैतिक पार्टियों ने उत्तराखंडियों की मांग को समर्थन देना शुरू कर दिया है। महापंचायत में उत्तराखंड कांग्रेस की ओर से राज्यमंत्री धीरेंद्र प्रताप शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का पत्र भी आयोजकों को सौंपा। धीरेंद्र ने कहा उत्तराखंडियों को उनकी आबादी के हिसाब से सियासी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले ही इसे समर्थन दे चुके हैं। पूर्व मेयर जगदीश ममगाई ने दिल्ली के राजनैतिक पटल पर उत्तराखंडियों की लगातार उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा, अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।