{"_id":"5b36514c4f1c1bb1508b5143","slug":"uttarakhand-politics-high-on-teacher-suspension-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तरा प्रकरण पर उत्तराखंड में चढ़ा सियासी पारा, अब सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तरा प्रकरण पर उत्तराखंड में चढ़ा सियासी पारा, अब सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 29 Jun 2018 09:03 PM IST
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प्रीतम सिंह
- फोटो : SELF
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तबादले की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से अभद्रता करने वाली उत्तरकाशी में तैनात टीचर उत्तरा बहुगुणा के मामले ने राज्य का सियासी पारा बढ़ा दिया है।
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कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तमाम आरोप लगाते हुए प्रदेशभर में पुतले फूंकने का एलान कर दिया है। भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस को अराजकता पसंद दल करार दिया। वहीं उत्तरा के निलंबन को लेकर सफाई देने के लिए बुलाई प्रेस कांफ्रेंस में भी सचिव भूपिंदर कौर औलख ने निलंबन के पीछे नई कहानी बता डाली। उन्होंने कहा कि निलंबन लगातार अनुपस्थित रहने के चलते किया गया है, जबकि निलंबन आदेश में उत्तरा के बिना अनुमति मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचना और अभद्रता करने की वजह का जिक्र किया गया है।
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बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री आवास पर बुलाए जनता मिलन कार्यक्रम में उत्तरा बहुगुणा ने खुद को पच्चीस साल से उत्तरकाशी में तैनात होने की बात मुख्यमंत्री को बताई। यह भी बताया कि उनके पति का देहांत हो चुका है और बच्चों की परवरिश के लिए उनका देहरादून रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने नौकरी की शर्तों को आधार बताते हुए तबादला न होने की बात कही तो उत्तरा भड़क गईं और उन्होंने मुख्यमंत्री को भरे जनता दरबार में भला-बुरा कह डाला। इस प्रकार अभद्रता से आगबबूला हुए सीएम ने उत्तरा को निलंबित करने के अलावा उसे हिरासत में लेने के आदेश दे डाले। उनके आदेश पर तत्काल अमल भी हो गया। इस घटनाक्रम को लेकर शुक्रवार को दिन भर सोशल मीडिया पर तमाम बयानबाजी होती रहीं। उधर लगातार सुगम में तैनाती पा रहे ‘वीआईपी शिक्षकों’ की सूची भी वायरल होने लगी। कुल मिलाकर दिन भर इस मुद्दे को लेकर चर्चा होती रही।
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मैं मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जब राज्य में लागू स्थानांतरण एक्ट की खुले रूप में धज्जियां उड़ाते हुए भाजपा के बड़े नेताओं, पदाधिकारियों और सरकार में बैठे लोगों की पत्नियों का दुर्गम से सुगम में स्थानांतरण किया जा सकता है, तो फिर एक दुखी महिला का भी किया जाना चाहिए।
-प्रीतम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
जिला मुख्यालयों में सरकार का पुतला दहन, एक को दून में धरना-प्रदर्शन
जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान सीएम-शिक्षिका विवाद में कांग्रेस पूरी तरह से कूद पड़ी है। सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने शनिवार को सभी जिला मुख्यालयों में सरकार का पुतला फूंकने और विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। एक जुलाई को दून में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की अगुवाई में कांग्रेस धरना-प्रदर्शन का बड़ा कार्यक्रम करेगी। पार्टी ने शिक्षिका का निलंबन तुरंत वापस न लेने की स्थिति में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका-सीएम विवाद में शुरुआती असमंजस के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने मीडिया से बातचीत में शुक्रवार को सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि महिला शिक्षक अपनी तकलीफ लेकर सीएम के जनता दरबार में आई थी। उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया है, उससे सीएम पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि जिन जनता दर्शन कार्यक्रम में समस्याएं दूर होने की जगह बढ़ती हो, वहां इसे करने का कोई फायदा नहीं है।
भाजपा संगठन आया मुख्यमंत्री के पक्ष में
जनता दर्शन कार्यक्रम के बाद उपजी स्थिति में भाजपा संगठन शुक्रवार को पूरी तरह से सरकार के पक्ष में खड़ा हो गया। पार्टी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह व्यवस्था नहीं, बल्कि अराजकता चाहती है। भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा है कि सीएम जनता दर्शन कार्यक्रम में जन सामान्य की समस्याओं को स्वयं सुन रहे हैं और समाधान कर रहे हैं। यह उनकी जनहितों के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण है। ये उनकी संवेदनशीलता का ही परिचायक है कि वे वेबसाइट पर पंजीकृत और ट्विटर पर भी मिलने वाली समस्याओं व शिकायतों का तत्काल निराकरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता दर्शन कार्यक्रम में शिक्षिका बिना किसी कारण से आपे से बाहर हो गई और मुख्यमंत्री के समझाने पर भी चुप नहीं हुई। उचित होता कि शिक्षिका मुख्यमंत्री के समक्ष शालीनता से अपनी समस्या रखती। मगर शिक्षिका कार्यक्रम में ख़ुद ही समस्या बन गई, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण बहुत गंभीर है, जिसमें शिक्षिका ने न केवल सारी मर्यादाओं का उल्लंघन किया, बल्कि घोर अनुशासनहीनता भी की। इसे किसी भी रूप में कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता। यह मामला व्यवस्था से भी जुड़ा है और यदि ऐसे मामलों को समर्थन दिया जाएगा, तो कोई भी कार्य करना संभव नहीं होगा।