फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   uttarakhand political scenario depend in rebel MLA.

उत्तराखंड सियासी संकटः बागी विधायकों के भविष्य पर निर्भर

Sat, 23 Apr 2016 12:51 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 23 Apr 2016 12:51 AM IST
सार

  • सदस्यता बहाल हुई तो भाजपा और सदस्यता बहाल नहीं हुई तो रावत सरकार मारेगी बाजी
  • सुनवाई लंबी खिंची तो मोदी सरकार को करना होगा संसद का सामना

विज्ञापन
uttarakhand political scenario depend in rebel MLA.
हरक स‌िंह रावत - फोटो : AmarUjala

विस्तार

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पर 27 अप्रैल तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक ने भाजपा और कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। उत्तराखंड में जारी सियासी संकट का ऊंट किसी भी करवट बैठ सकता है।

विज्ञापन


दोनों ही दलों का सारा दारोमदार 9 बागी विधायकों के भविष्य पर टिका है। अगर इन विधायकों की सदस्यता बहाल हुई तो सियासी बाजी भाजपा जीतेगी। इसके उलट फैसला आने पर रावत सरकार की वापसी तय हो जाएगी।
विज्ञापन


हालांकि भाजपा के सामने एक अन्य परेशानी भी है। अगर सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट की तर्ज पर तत्काल फैसला करने के बदले सुनवाई के लिए लंबा वक्त लिया तो इससे मोदी सरकार और भाजपा की परेशानी बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में मोदी सरकार को सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में राष्ट्रपति शासन पर मंजूरी हासिल करनी होगी। चूंकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। ऐसे में राज्य में लगाए गए राष्ट्रपति शासन को मोदी सरकार को वापस लेना पड़ेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

भाजपा कांग्रेस दोनों की बढ़ी हुई हैं धड़कनें

uttarakhand political scenario depend in rebel MLA.
हरक सिंह रावत - फोटो : RajivGupta/AmarUjala

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल सांस रोक कर बागी विधायकों के संदर्भ में आने वाले फैसले का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की राहत को अभी फौरी ही माना जाएगा क्योंकि राष्ट्रपति शासन 27 तक जारी रखने के अलावा इसमें पार्टी के लिए राहत की फिलहाल कोई बात नहीं है। मुख्य सवाल बागी सदस्यों की सदस्यता का है, जिस पर अभी फैसला आना है।

अपने अपने दावे
बागी विधायकों पर भाजपा और कांग्रेस अपने अपने पक्ष में दलील दे रहे हैं। भाजपा का कहना है कि विनियोग बिल पेश किए जाने के दौरान ही रावत सरकार गिर गई थी। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष विधायकों के भविष्य पर कैसे फैसला कर सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह स्पीकर का विशेषाधिकार है। सभी 9 बागी विधायक भाजपा के साथ सार्वजनिक तौर पर खड़े हुए। ऐसे में इनके खिलाफ दल विरोधी कानून का मामला बनता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed