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उत्तराखंड पुलिस लूटकांडः जानिए एक कॉल ने कैसे पूरी साजिश को कर दिया तार-तार 

Thu, 18 Apr 2019 12:33 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून
राकेश शर्मा, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 18 Apr 2019 12:33 PM IST
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uttarakhand police loot case one call break the mystery
कोर्ट में पेश होने के लिए जाते आरोपी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार से नोटों से भरा बैग लूटने के मामले में पुलिस को दूर तक यह अंदेशा नहीं था कि लूट में वर्दीधारी शामिल हो सकते हैं। पुलिस यही अनुमान लगा रही थी कि किसी गैंग ने पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल कर वारदात को अंजाम दिया है। जांच भी इसी दिशा में चल रही थी कि सिपाही मनोज अधिकारी की एक कॉल ने पूरी साजिश को तार-तार कर दिया। 

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लूटपाट की वारदात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली से एक दिन पहले चार अप्रैल की रात हुई थी। उस दिन अन्य दिनों के मुकाबले पुलिस काफी सतर्क थी। शहर के चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात थी। पीएम की रैली के मद्देनजर प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी काफी संख्या में पुलिसकर्मी देहरादून में तैनात थे। सात अप्रैल को प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार से लूट की शिकायत सामने आई थी तो प्रथम दृष्टया पुलिस ने उस पर संदेह जताया। 

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लूटपाट की बात बेमानी लग रही थी

पुलिस मान रही थी कि प्रधानमंत्री की रैली से एक दिन पहले पूरे शहर में सुरक्षा का कड़ा पहरा था, ऐसे में लूटपाट की बात बेमानी लग रही थी। पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की तो अनुरोध पंवार के बयान सत्यापित होते चले गए।

हालांकि, पुलिस को शक था कि बदमाशों ने पुलिस की वर्दी पहनकर इस घटना को अंजाम दिया है। इसमें दूर तक पुलिसकर्मियों के शामिल होने का अंदेशा नहीं था। सरकारी कैमरों की फुटेज से तो लूट में प्रयुक्त स्कारर्पियो को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पाई थी।  

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होमगार्ड ने किया था खुलासा

प्रापर्टी डीलर अनुरोध पंवार ने पुलिस को बताया था कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें सर्वे चौक पर छोड़ दिया था। पुलिस ने चार अप्रैल की रात ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों से पूछताछ शुरू की।
 

 

इसी बीच स्थैतिक निगरानी टीम में शामिल होमगार्ड ने खुलासा किया कि उस रात कार में सवार एक सिपाही ने उसके मोबाइल से किसी को फोन किया था। इस इसी कॉल ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचा दिया। दरअसल प्रापर्टी डीलर को रोकने के बाद आईजी गढ़वाल की गाड़ी में सवार पुलिसकर्मियों ने उन्हें अपने साथ बैठा लिया था।

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अपना मोबाइल आईजी गढ़वाल की गाड़ी में ही भूल आया था आरोपी सिपाही

प्रापर्टी डीलर की कार सिपाही मनोज अधिकारी पीछे-पीछे लेकर चल रहा था। इसी बीच जाम लगने के कारण कार चला रहा मनोज अधिकारी काफी पीछे छूट गया था। जबकि, वह अपना मोबाइल आईजी गढ़वाल की गाड़ी में ही भूल आया था। ऐसे में उसने रास्ते में एक होमगार्ड से मोबाइल लेकर आगे आईजी की गाड़ी चला रहे सिपाही हिमांशु उपाध्याय को फोन किया था। होमगार्ड से मिली जानकारी के बाद पुलिस हिमांशु तक पहुंची और फिर अन्य आरोपियों तक।

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