उत्तराखंड पुलिस सतर्क, इस वजह से टाडा में सजा काटने वाले की गतिविधियों पर निगाह
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तराई में खालिस्तान आंदोलन के समर्थकों की दस्तक के बाद से पुलिस और खुफिया तंत्र की सक्रियता बढ़ गई है। अब तक 24 से अधिक समर्थक पुलिस की रडार पर हैं। जांच में सामने आया है कि टाडा के तहत जेल गया एक खालिस्तानी उत्तराखंड में धार्मिक संस्था का पदाधिकारी बन चुका है।
अब पुलिस उसकी हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं। पुलिस ने बीती 22 फरवरी को सोशल मीडिया (फेसबुक) पर खालिस्तानी आंदोलन के नेता रहे जरनैल सिंह भिंडरवाला के समर्थन में वीडियो और पोस्टर पोस्ट करने वाले बाजपुर के दो खालिस्तानी समर्थक युवकों चिह्नित किया था, जो बरेली और गुजरात में नौकरी करते हैं।
पुलिस खालिस्तानी समर्थकों के चिन्हीकरण में लगी
पुलिस ने दोनों के फेसबुक एकाउंट हटाने के साथ ही उनके परिजनों को चेताया भी था। इसके बाद से पुलिस खालिस्तानी समर्थकों के चिन्हीकरण में लगी है। पुलिस की माने तो उत्तराखंड में एक धार्मिक संस्था ने अपनी कार्यकारिणी में सफेदपोश खालिस्तानी को भी शामिल किया है, जिसका यूपी के शाहजहांपुर, दिल्ली के अलावा उत्तराखंड में नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि पुलिस अब तक 24 से अधिक खालिस्तानी समर्थकों को चिह्नित कर चुकी है, जिनका डेटा संकलित किया जा रहा है।
खालिस्तानी समर्थक चिह्नित हुए हैं। उत्तराखंड में एक खालिस्तानी ऐसा भी सामने आया है जो 90 के दशक में टाडा कानून के तहत सजा काट चुका है। उसके नेटवर्क का भी पता लगाया जा रहा है।
- हिमांशु शाह, सीओ रुद्रपुर