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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: आरक्षण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

Tue, 24 Sep 2019 10:18 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 24 Sep 2019 10:18 AM IST
सार

  • हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला जनहित का नहीं 
  • प्रभावित व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर दायर कर सकते हैं याचिका

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Uttarakhand Panchayat Election 2019 High court Rejects petition Against Reservation
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पंचायत सीटों पर तय किए गए आरक्षण के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह मामला जनहित का नहीं है।

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खंडपीठ ने कहा कि प्रभावित उम्मीदवार इस मामले में व्यक्तिगत तौर पर याचिका दायर कर सकते हैं।  मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 

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मामले के अनुसार ऊधमसिंह नगर निवासी अरुण कुमार शुक्ला ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि निदेशक पंचायती राज ने चुनाव अधिसूचना जारी हो जाने के बाद आरक्षण में फेरबदल किया है। इसमें कहा गया कि 16 सितंबर को किया गया फेरबदल नियमानुसार गलत है।

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चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद पंचायती राज निदेशक के स्तर से सीटों पर आरक्षण में फेरबदल नहीं किया जा सकता है। पक्षों की सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इससे प्रभावित व्यक्ति निजी स्तर पर याचिका दायर कर सकते हैं।

दो बच्चों की सीमा मामले में तत्काल सुनवाई से कोर्ट का इनकार

हाईकोर्ट ने क्षेत्र और जिला पंचायत सदस्य पद के लिए दो बच्चों की सीमा के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इंकार करते हुए कहा कि जब मामला सूची पर आएगा तभी मामले को सुना जाएगा। 


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ में सोमवार को तत्काल सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया गया लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब मामला सुनवाई के लिए सूची पर आएगा तभी मामले को सुना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि पंचायत के संशोधन की अधिसूचना जारी हुए दो माह का समय बीत गया है। याचिकाकर्ताओं को आपत्ति होने पर समय रहते याचिका दायर करनी चाहिए थी।


बता दें कि कोर्ट ने ग्राम पंचायत के लिए 2 बच्चों की सीमा में छूट दी थी। 19 सितंबर को दिए फैसले में कोर्ट ने ग्राम पंचायत के लिए हुए संशोधन 8(1) आर को 25 जुलाई 2019 के बाद लागू करने के निर्देश दिए थे जबकि क्षेत्र पंचायत के लिए 53(1) आर व जिला पंचायत के लिए 90(1) आर का याचिकाओं में कोई जिक्र नहीं था। कोर्ट ने इसके चलते इस पर कोई टिप्पणी अथवा फैसला नहीं दिया था। इसके बाद मामले में दोबारा याचिका दायर कर सोमवार को तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया था।

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