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Uttarakhand: पंचायतों में मतदाता विवाद; बड़ा सवाल...जब नियम नहीं तो शहरी मतदाता पंचायतों की सूची में कैसे आ गए

Sat, 12 Jul 2025 12:27 PM IST
रेनू सकलानी आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 12 Jul 2025 12:27 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने ऐसे प्रत्याशियों के पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है जिनके नाम स्थानीय नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों जगहों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दो मतदाता सूचियों में नाम वाले प्रत्याशियों का चुनाव लड़ना पंचायत राज अधिनियम के विरुद्ध है।

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Uttarakhand Panchayat Chunav Voter dispute in Panchayats voter list List of bodies
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधान को दरकिनार करते हुए निकायों में शामिल मतदाताओं को पंचायतों में मतदाता बनाने पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। इसकी जांच की मांग की जा रही है कि आखिर अधिनियम में प्रावधान न होने के बावजूद पंचायतों की सूची में ये शहरी मतदाता कैसे आ गए।

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दरअसल, उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम 2016 की धारा-9 की उपधारा-6 के तहत कोई भी व्यक्ति एक से अधिक क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट में नाम नहीं रख सकता। उपधारा-7 में ये स्पष्ट किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम पहले से किसी अन्य नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत की मतदाता सूची में है, तो उसे नया नामांकन तभी मिलेगा जब वह दिखाए कि उस मतदाता सूची से उसका नाम हटा दिया गया है। लेकिन खुलेआम मतदाता बनाने वालों ने इस अधिनियम का उल्लंघन किया है।

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आयोग के इस पत्र से बढ़ा असमंजस

राज्य निर्वाचन आयोग ने इस मामले में एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें बताया गया था कि पंचायती राज अधिनियम की धारा 9(13) के अनुसार, ऐसा व्यक्ति जिसका नाम ग्राम पंचायत के किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल हो, उस ग्राम पंचायत में वोट देने और किसी भी पद पर चुनाव लड़ने, नामांकन करने, नियुक्ति का पात्र होगा।

इसी प्रकार, प्रावधान क्षेत्र पंचायत के लिए धारा 54(3) और जिला पंचायत के लिए धारा 91(3) में दिए गए हैं। इस सर्कुलर के जारी होने के बाद असमंजस बढ़ गया। आयोग का स्पष्ट रुख था कि जो मतदाता सूची में शामिल हो चुका, वह मतदान व चुनाव लड़ने का अधिकारी है जबकि नाम गलत तरीके से शामिल कराने वालों को लेकर आयोग ने कोई स्पष्ट रुख नहीं दिखाया। लिहाजा, हाईकोर्ट ने आयोग के इस सर्कुलर पर रोक लगा दी है।

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अब सर्कुलर पर तो रोक लगी लेकिन आगे क्या होगा?

सवाल ये भी है कि हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। केवल चुनाव लड़ने संबंधी सर्कुलर पर रोक लगाई है। लिहाजा, जो लोग नामांकन कर चुके हैं, उनका क्या होगा। निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के हिसाब से नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच के बाद नाम वापसी की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। ऐसे में अधिसूचना में संशोधन न किया गया तो दो जगह नाम शामिल वाले प्रत्याशियों का क्या होगा? आयोग सचिव राहुल गोयल का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद ही इस पर स्पष्ट बात की जा सकेगी।

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