{"_id":"6035d27224abfc7d66197e64","slug":"uttarakhand-pakistan-origin-american-woman-farida-not-appear-in-court-four-year-imprisonment-continues","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट में पेश नहीं हुई पाक मूल की फरीदा, बगैर वीजा और पासपोर्ट के मामले में चार साल की सजा बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोर्ट में पेश नहीं हुई पाक मूल की फरीदा, बगैर वीजा और पासपोर्ट के मामले में चार साल की सजा बरकरार
Wed, 24 Feb 2021 09:48 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काशीपुर
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 24 Feb 2021 09:48 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर सुनाया फैसला
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बगैर वीजा और पासपोर्ट के मामले में पाक मूल की अमेरिका नागरिक फरीदा मलिक को चंपावत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से सुनाई गई चार साल की सजा को चंपावत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बरकरार रखा है।
विज्ञापन
अदालत ने यह फैसला सुनवाई के दिन (22 फरवरी) को फरीदा के कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर सुनाया। फरीदा की अनुपस्थिति में उसके अधिवक्ता को फैसले की प्रति उपलब्ध करा दी गई है। डीजीसी सुनील खर्कवाल ने बताया कि फरीदा के हाजिर न होने पर उसके जमानतियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। बता दें कि फरीदा वर्तमान में सशर्त जमानत पर थी।
विज्ञापन
पिछले माह अपने कथित पति की तलाश में फरीदा काशीपुर में मंडराती रही। इस दौरान वह सफाई साक्ष्य के लिए नियत तिथि पर भी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई थी। इस पर उसके अधिवक्ता को अगली तारीख लेनी पड़ी थी। कथित पति की तलाश में फरीदा ने दिल्ली की एक एनजीओ से भी संपर्क साधा था।
विज्ञापन
12 जुलाई 2019 को पकड़ी गई थी फरीदा
12 जुलाई 2019 को काठमांडो नेपाल के रास्ते बनबसा पहुंची पाक मूल की अमेरिकी नागरिक फरीदा मलिक को बनबसा के इमीग्रेशन चेकपोस्ट पर हिरासत में लिया गया था। 13 जुलाई को उसके खिलाफ 3 पासपोर्ट एक्ट और 14 विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
विवेचना के दौरान उसे लोहाघाट से अल्मोड़ा जेल शिफ्ट कर दिया गया था। पांच मार्च 2020 को चंपावत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने फरीदा को दोषी करार देते हुए चार साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद फरीदा सशर्त जमानत पर थी।
फरीदा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को चुनौती देते हुए चंपावत के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता (क्राइम) सुनील कुमार खर्कवाल ने तीन और गवाह प्रस्तुत किए, जिन्होंने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया।
इस मुकदमे में तीन फरवरी को फरीदा को सफाई साक्ष्य पेश करने के लिए अवसर दिया गया था। कोर्ट ने निर्णय के लिए 22 फरवरी की तिथि नियत की थी लेकिन फरीदा 22 फरवरी को कोर्ट में पेश नहीं हुई। इस पर न्यायाधीश आशीष नैथानी ने निचली अदालत की ओर से फरीदा को सुनाई गई सजा को बरकरार रखा।