उत्तराखंड : अब पेड़-पौधे खुद बयां करेंगे अपनी कहानी, वन अनुसंधान केंद्र ने किया अनूठा प्रयोग
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मैं मालू हूं। मैं फेबऐसी परिवार से ताल्लुक रखती हूं। मुझे भोजन, दवा, फाइबर, टैनिन और अन्य सामग्रियों के स्थानीय स्रोत के रूप में काटा जाता है...। उत्तराखंड में अगर आप किसी वनस्पति को देखें और आपको इस तरह से उसका परिचय मिले तो यह अचंभित करने वाला होगा, लेकिन आपको बिना किसी की मदद से वनस्पति की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए वन अनुसंधान केंद्र ने वनस्पतियों के माध्यम से ही उनका परिचय देने की व्यवस्था की है।
देश-विदेश में पाई जाने वाली वनस्पतियों पर शोध करने के साथ ही वन अनुसंधान केंद्र उनका संरक्षण भी करता है। संरक्षण और शोध के लिए कुमाऊं मंडल में हल्द्वानी, नैनीताल, रानीखेत, पिथौरागढ़ और गढ़वाल मंडल में गोपेश्वर, देहरादून में शोध केंद्र, नर्सरियां स्थापित की गईं हैं। देश-विदेश के लोग इन वनस्पतियों को देखने आते हैं, लेकिन हर किसी को वनस्पतियों के संबंध में पूरी जानकारी नहीं मिल पाती।
इसके लिए अनुसंधान केंद्र ने अब अनूठा प्रयोग करते हुए वनस्पतियों के माध्यम से ही उनकी जानकारी देने की व्यवस्था की है। हर केंद्र में वनस्पति के साथ एक बोर्ड लगा होगा, जिसमें उसकी संपूर्ण जानकारी होगी।
आत्मिक रूप से होगा जुड़ाव
मसलन उसका इतिहास, नाम, प्रजाति, उपयोग के साथ ही अन्य ब्योरा। इससे बिना किसी की मदद लिए कोई भी वनस्पति के बारे में समग्र जानकारी ले सकता है। हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र से इसकी शुरुआत की गई है।
इससे लोगों का वनस्पतियों से आत्मिक जुड़ाव भी होगा। आमतौर पर लोग नर्सरी आदि के भ्रमण में वनस्पतियों को देखकर लौट आते हैं, लेकिन इस तरह से जानकारी लोगों के लिए भावनात्मक होगी और उनका प्रकृति के तरफ रुझान भी बढ़ेगा।
पेड़-पौधों के प्रति लगाव पैदा करने के लिए लोगों को वनस्पतियों के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है। इसके लिए वनस्पतियों के माध्यम से ही उनके बारे में जानकारी देने का प्रयास किया गया है। काफी समय से इस योजना पर काम चल रहा था, जिसे अब धरातल पर उतारा है। इससे हर किसी को हर वनस्पति की समग्र जानकारी मिलेगी। - संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान