उत्तराखंड की हसीन वादियों में नहीं आना चाहते सैलानी!
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राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार भले ही लगातार प्रयास कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि देश-विदेश के पर्यटक उत्तराखंड में खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे है। नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर के अनुसार देश का सिर्फ तीन फीसदी पर्यटक ही उत्तराखंड की ओर रुख कर रहा है। विदेशी पर्यटकों की बात करें तो मात्र एक फीसदी ही उत्तराखंड घूमने आते हैं।
अभी हाल ही में नाबार्ड ने स्टेट फोकस पेपर (एसएफपी) जारी किया था। एसएफपी के आंकड़ों पर नजर डालें तो जो पर्यटक उत्तराखंड आते भी हैं वे मैदानी इलाकों तक ही सीमित रहते हैं। देसी पर्यटकोें में से 67 फीसदी पर्यटक हरिद्वार, ऋषिकेश और नैनीताल के मैदानी इलाकों तक घूमते-फिरते हैं, जबकि 33 फीसदी पर्यटक पहाड़ों की यात्रा पर जा रहे हैं।
हालांकि विदेशी पर्यटकों के मामले में स्थिति थोड़ी बेहतर है। उत्तराखंड पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों में से 40.73 फीसदी नैनीताल, मसूरी, औली, बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे धार्मिक एवं पर्यटक महत्व के स्थलों पर जा रहे हैं।
राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विकास में तेजी: रिपोर्ट
नाबार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पर्यटन सुविधाओं के विकास में तेजी आई है। पर्यटक महत्व के स्थलों पर बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास हुआ है। राज्य में एडवेंचर टूरिज्म की भी संभावनाएं बढ़ी हैं।
सरकार ने इस दिशा में तेजी से काम शुरू किया है आने वाले वर्षों में इसके अपेक्षित परिणाम भी सामने आएंगे। लेकिन अभी भी तमाम ऐसे क्षेत्र हैं जिसमें काम किया जाना बाकी है। पर्यटन योजनाओं के व्यापक प्रचार प्रसार की जरूरत है।
क्या कहते हैं पर्यटन सचिव
सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन विकास को लेकर तमाम योजनाएं संचालित की जा रही है। हिमालय दर्शन, स्वदेश दर्शन, एडवेंचर टूरिज्म जैसी योजनाओं पर काफी फोकस किया जा रहा है। आने वाले समय में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
-शैलेश बगौली, सचिव पर्यटन