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उत्तराखंड : पर्वतीय राज्यों में सामरिक महत्व की सड़कों की चौड़ाई सात मीटर होगी, मुख्य सचिव को भेजा नया सर्कुलर
Thu, 17 Dec 2020 09:38 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 17 Dec 2020 09:38 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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उत्तराखंड समेत सभी पर्वतीय राज्यों में भारत चीन बॉर्डर को फीड करने वाले, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय राजमार्गों व सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत तैयार हो रहीं सामरिक सड़कों की चौड़ाई सात मीटर कर दी गई है। संशोधित दिशा-निर्देश के मुताबिक पर्वतीय व पहाड़ी इलाकों में ऐसे सामरिक मार्गों का कैरिज-वे सात मीटर चौड़ा होगा। इसके अलावा मार्गों के दोनों ओर डेढ़-डेढ़ मीटर पक्के किनारे होंगे।
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इस संबंध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सर्कुलर जारी कर दिया है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव को भी यह सर्कुलर भेजा गया है। मंत्रालय के अधीक्षण अभियंता जगत नारायण की ओर से जारी सर्कुलर में रक्षा मंत्रालय की समिति का जिक्र है।
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रक्षा मंत्रालय ने मुख्य अभियंताओं की एक समिति बनाई थी। समिति ने सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंपी थीं। मंत्रालय ने समिति की सिफारिश के आधार पर पर्वतीय राज्यों में सामरिक महत्व की सड़कों की चौड़ाई के संशोधित मानक तय किए हैं।
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नियमों में 5.5 मीटर का था प्रावधान
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के 23 मार्च 2018 के सर्कुलर में पर्वतीय राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्गों व सेंट्रल सेक्टर की सड़कों की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर तय की गई थी। मंत्रालय के इसी आदेश के आधार पर चारधाम ऑलवेदर रोड की चौड़ाई के मानकों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।
चीन से सीमा पर तनाव प्रमुख वजह
सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर चीन की बढ़ती घुसपैठ से पिछले कुछ समय में तनाव बढ़ा है। चीन की तरह ही केंद्र सकार भी बॉर्डर पर सड़कों का जाल बिछा रही है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्रों में मार्गों की सीमित चौड़ाई के मानक सामरिक महत्व की सड़कों के आड़े आ रहे थे। इसी को देखते हुए रक्षा मंत्रालय की समिति राजमार्ग मंत्रालय को अपनी सिफारिशें सौंपी।
सीएम रावत ने भी की थी वकालत
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सामरिक महत्व की सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने की वकालत की थी। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा था।