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आज देहरादून पहुंची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रवाना की गई विजय ज्योति, सैनिकों ने दी सलामी

Sat, 19 Dec 2020 12:19 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 19 Dec 2020 12:19 AM IST
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uttarakhand news: Vijay Jyoti sent by Prime Minister Narendra Modi reach Dehradun today
विजय ज्योति आज देहरादून पहुंची - फोटो : amar ujala

1971 युद्ध के 50 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रवाना की गई विजय ज्योति शुक्रवार को देहरादून पहुंची। यहां विजय ज्योति का सेना के जवानों, अधिकारियों ने जोरदार स्वागत किया। क्लेमेंटटाउन में पहुंचे झील के पास बने शहीद जसवंत सिंह की प्रतिमा के सामने विजय ज्योति को सलामी दी गई। इस दौरान युद्ध भाग लेने वाले ले. जनरल आनंद स्वरूप ने युद्ध के दौरान के अनुभवों को साझा कर सैन्य अधिकारियों और सैनिकों में जोश भरा। 

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विजय ज्योति करीब 10:30 बजे क्लेमेंटटाउन के झील के पास स्थित शहीद जसवंत सिंह के प्रतिमा के सामने पहुंची। जहां विधायक विनोद चमोली, जीओसी 14 रैपिड मेजर जनरल राहुल आर सिंह, कैंट बोर्ड अध्यक्ष ब्रिग्रेडियर रवि डिमरी, सीईओ अभिषेक सिंह राठौर, उपाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह कंडारी, भाजपा नेता महेश पांडे सहित क्लेमेंटटाउन के क्षेत्रवासियों ने विजय ज्योति का स्वागत किया।
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इस दौरान ब्रिगेडियर रवि डिमरी ने ज्योति को 1971 के हीरो रहे कैप्टन हरिदत्त पांडे और सूबेदार मान सिंह बिष्ट को सौंपा। यहां विजय ज्योति को सलामी देने के बाद विजय ज्योति गोल्डन की डिवीजन के रंजीत सिंह ऑडिटोरियम में लाया गया। वहां जीओसी 14 रैपिड राहुल आर सिंह सहित सैन्य के अन्य अधिकारियों, जवानों ने विजय ज्योति को सलामी देकर स्वागत किया। इस दौरान 1971 भारत-पाक युद्ध में योगदान देने वाले पूर्व सैन्य अधिकारियों, जवानों और वीर नारियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान जाबाजों को सम्मानित करते हुए आईएमए के कमांडेंट ले. जनरल हरिंद्र सिंह ने कहा कि 1971 की लड़ाई एक पूर्व लड़ाई थी इस युद्ध ने साबित कर दिया कि भारत और उसके सैनिकों में कितनी काबिलियत है।
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कहा कि वर्ल्ड वार दो के बाद भारत-पाक के बीच हुआ यह युद्ध सबसे बड़ा था। इसमें भारत के अलावा पाकिस्तान के भारी संख्या में जवान, जेसीओ घायल और मारे गए। भले ही यह लड़ाई 13 दिन की थी, लेकिन यह आमने-सामने वाली एक अहम लड़ाई थी। इसके बाद पिछले 40-50 साल में भारत ने ऐसी लड़ाई नहीं लड़ी है, लेकिन वर्तमान में चीन के साथ ऐसे हालत बन रहे हैं। इसलिए सेना के जवानों, अधिकारियों को इस लड़ाई और इसमें प्रतिभाग करने वालों से सीखना पड़ेगा।  

इन्हें किया गया सम्मानित 

- एवीएसएम, महावीर चक्र,  ले.जनरल आनंद स्वरूप
- ब्रिगेडियर महेंद्र प्रताप सिंह गुप्ता
- सेना मेडल, ब्रिगेडियर एनके गुप्ता
- ब्रिगेडियर बलराज कपूर 
- सूबेदार मेजर, धन सिंह 
-सूबेदार मेजर, मोहन प्रसाद जोशी
-सूबेदार मेजर एसएस बिष्ट 
- सूबेदार अवतार सिंह 
-नरेंद्र कुमार ओवरॉय 
- रंजीत सिंह नेगी, एयर फोर्स 
- सीपीओ महेंद्र सिंह, इंडियन नेवी

ये वीर नारियों हुईं सम्मानित 
- चित्रा देवी
- भुन्द्रा देवी 
- प्रभा देवी 

ले.जनरल आनंद स्वरूप ने भरा जोश

विजय दिवस के उपलक्ष्य में विजय ज्योति के देहरादून पहुंचने पर सेना की गोल्डन की डिवीजन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 1971 भारत-पाक युद्ध के दौरान अहम मोर्चे पर तैनात ले. जनरल आनंद स्वरूप ने युद्ध के दास्तां व अनुभवों को साझा कर उपस्थित सैन्य अधिकारियों, जेसीओ और जवानों में जोश भर दिया। 

ले. जनरल ने कहा कि जब भारत पाक युद्ध शुरू हुआ तो उस समय वह सेना के किलो फोर्स के कमांडर थे। जिसे उसी समय गठित किया गया था और युद्ध समाप्त होने के बाद फोर्स को खत्म कर दिया गया था। उनके साथ उस समय चार बटालियन भेजी गई थी, जिसमें दो भारत की थी और दो बांग्लादेश की। इसमें से भी एक बटालियन ऐसी थी, जिसे युद्ध का अनुभव नहीं था। वह केवल उग्रवाद वाले इलाकों में काम कर रहे थे।

इसलिए उन्हें कम समय में ट्रेन करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन सभी ने युद्ध में अच्छा प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के महत्वपूर्ण इलाके पर तीन दिन में ही कब्जा कर लिया था। इसके बाद कुमीरा हाट को भी 48 घंटे के संघर्ष के बाद अपने कब्जे में ले लिया था। युद्ध के दौरान उस समय पाकिस्तान हमसे मजबूत था। उसके पास अच्छे हथियार, गोला बारूद और साजो-सामान था, जबकि हमारे पास ऐसा कुछ नहीं था। बावजूद इसके भी हम इस युद्ध में विजयी रहे और विश्व को बता दिया कि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र की ओर अग्रसर है। 

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