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तूल पकड़ रही करोड़ों की बकायेदार कंपनी पर यूपीसीएल की मेहरबानी, सीबीआई से जांच चाहती है कांग्रेस

Tue, 01 Sep 2020 01:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 01 Sep 2020 01:51 PM IST
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uttarakhand news:  UPCL owes over crores of defaulted company
सीबीआई - फोटो : ani

उत्तराखंड पावर कारपोरेशन में एक कंपनी पर मेहरबानी की कहानी अब तूल पकड़ रही है। मामला बिजली खरीदने वाली दिल्ली की एक कंपनी का है, जिस पर वर्ष 2016 से करीब 70 करोड़ रुपये की बकायेदारी है। आरोप है कि कंपनी ने यूपीसीएल से बिजली तो खरीदी लेकिन करार के अनुसार, पूरा पैसा नहीं दिया। अब मामला जांच में उलझा है। लेकिन विपक्ष इस मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने का दबाव बना रहा है। मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग तक उठने लगी है।

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अमर उजाला ने तीन अगस्त 2020 को बिजली बेचने वाली कंपनी पर यूपीसीएल के करोड़ों फंसे शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। पूर्व एमडी ने सेवानिवृत्ति के आखिरी दिन इस प्रकरण की जांच के लिए एक कमेटी बना दी थी। कमेटी पिछले एक महीने से मामले की जांच कर रही है। सौदे से जुड़े दस्तावेजों की जांच पड़ताल हो रही है और यह कितने दिन और चलेगी यह बताना मुश्किल है। जांच कमेटी से जुड़े एक सदस्य का कहना है कि अभी अनुबंध से जुड़े दस्तावेजों की छानबीन हो रही है। एक-एक दस्तावेज का मिलान किया जा रहा है। इसलिए इसमें अभी काफी समय लगेगा। 
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जाहिर है कि मामला जांच में उलझ गया है। लेकिन कांग्रेस ने इस मामले में बेसब्र हो रही है। उसने यूपीसीएल पर जांच को लेकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सड़कों पर उतर कर कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी इस घोटाले में निगम के अधिकारियों की सांठगांठ मान रही है और पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रही है। उधर, सचिव ऊर्जा राधिका झा का कहना है कि यह कोई मसला ही नहीं है।
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सरप्लस बिजली खरीदने वाली कंपनी से बाकायदा एक करार होता है, जिसमें उसे एक निश्चित अवधि में भुगतान करना होता है। उस करार में देरी से भुगतान करने पर अतिरिक्त राशि ब्याज समेत देने की भी शर्त होती है। लेकिन मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे कांग्रेस नेता लालचंद शर्मा का दावा है कि कंपनी पर जान बूझकर मेहरबानी की गई है और इसमें कोई न कोई खेल हुआ है। इसलिए ये मामला सीबीआई को सौंपना चाहिए।


यूपीसीएल में चलेगा सफाई अभियान

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के तहत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी यूपीसीएल में सफाई अभियान के पक्ष में यही है। ये काम उन्होंने आईएएस अफसर नीरज खैरवाल को सौंपा है। खैरवाल यूपीसीएल के एमडी हैं। उन्होंने यूपीसीएल से संबंधित भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच अपने स्तर पर शुरू कर दी है। पुराने घोटालों को लेकर अभी वह ज्यादा मुखर नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि वह पहले साक्ष्य जुटा लेना चाहते हैं। इसके बाद यूपीसीएल में अभियान चलेगा। उधर, शासन स्तर पर तीनों ऊर्जा निगमों का स्पेशल ऑडिट पहले ही बैठा दिया गया है।

यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि प्रकरण की कोई जांच चल रही है तो यह निष्पक्ष ढंग से होगी। - डॉ.नीरज खैरवाल, प्रबन्ध निदेशक, यूपीसीएल

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