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उत्तराखंड : भालुओं के लिए प्रदेश में बनेंगे दो रेस्क्यू सेंटर, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने की घोषणा

Wed, 28 Oct 2020 01:16 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 28 Oct 2020 01:16 PM IST
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Uttarakhand news: two bear rescue center will be set up in state, CM Trivendra Singh Rawat announced
- फोटो : अमर उजाला (File Photo)

भालू और मानव संघर्ष में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए अब वन विभाग प्रदेश में दो भालू रेस्क्यू सेंटर भी बनाएगा। इसमें से एक पिथौरागढ़ और दूसरा चमोली में बनेगा। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। वन विभाग ने भी इसके बाद इस पर काम शुरू कर दिया है। 

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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक प्रदेश में भालुओं के लिए कोई रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर नहीं है। यह भी अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रदेश में भालुओं की कुल संख्या कितनी है। अब ये दो सेंटर बनाए जाएंगे। एक चमोली में बनेगा और दूसरा पिथौरागढ़ में बनाया जाएगा। दोनों ही सेंटर एक तरह से भालुओं के पुनर्वास केंद्र भी होंगे। घायल भालू के ठीक होने तक सेंटर में रहेंगे। कैंपा से फंड की व्यवस्था की जाएगी। 
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मंगलवार को वन विभाग के मंथन सभागार में ई आफिस कार्यालय के शुभारंभ समारोह में सीएम ने इन केंद्रों को बनाने की घोषणा की। सीएम ने मानव वन्यजीव संघर्ष के बढ़ रहे मामलों पर चिंता जाहिर की और कहा कि नैनीताल में लागातार तीन दिन से भालू और मानव संघर्ष की जानकारी मिल रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक बंदरों के लिए चार रेस्क्यू सेंटर बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजा गया है। 
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तीन तरह के भालू पाए जाते है उत्तराखंड में

प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्र में भूरे भालू, मध्य हिमालीय क्षेत्र में काले भालू और निचले क्षेत्र में स्लोथ बियर पाए जाते हैं। भालू सामान्य रूप से मानव के प्रति हिंसक नहीं होते, लेकिन प्रदेश में मानव संघर्ष की इनकी घटनाओं में इजाफा हो रहा है। एक अध्ययन के मुताबिक पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी मेें 200 से अधिक काले भालू हैं। चंपावत, नैनीताल और बद्रीनाथ में भी 100 से अधिक काले भालू हैं। स्लोथ बियर और मानव संघर्ष के करीब 147 मामले 12 साल में दर्ज किए गए।

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