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उत्तराखंड: टीएचडीसी-यूजेवीएनएल मिलकर चार साल में कोई प्रोजेक्ट नहीं कर पाए शुरू, उठ रहे हैं सवाल
Sat, 19 Sep 2026 07:06 PM IST
Renu Saklani
आफताब अजमत, देहरादून
आफताब अजमत, देहरादून
Published by: Renu Saklani
Updated Sat, 19 Sep 2026 07:06 PM IST
सार
उत्तराखंड में ऊर्जा परियोजनाओं को रफ्तार देने के मकसद से बने THDC-UJVNL के संयुक्त उपक्रम को चार साल बाद भी पहली परियोजना का इंतजार है। पांच परियोजनाओं के प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाए, जबकि हरिद्वार नगर निगम से जुड़ी छठी परियोजना भी एमओयू के बाद अटक गई।
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बैठक (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सूचना
विस्तार
जिस सोच के साथ राज्य में टीएचडीसी-यूजेवीएनएल का संयुक्त उपक्रम बनाया गया, चार साल में वह धरातल पर कुछ नहीं कर पाया। पांच प्रोजेक्ट दिए लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा। छठा नगर निगम हरिद्वार का प्रोजेक्ट भी एमओयू के बाद लटक गया।टीएचडीसीआईएल-यूजेवीएनएल संयुक्त ऊर्जा कंपनी (ट्यूको) को वैसे तो मार्च 2023 में मंजूरी मिली थी लेकिन एक दिसंबर 2023 को ये अस्तित्व में आ गई थी।
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इस उपक्रम से जो भी परियोजनाएं बनाई जाएंगी, उसमें टीएचडीसी की 74 प्रतिशत और यूजेवीएनएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड में चयनित स्थलों पर जल विद्युत और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करना, उनका कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव करना है।
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ईसी रोड पर इसका एक कार्यालय भी है। शुरुआत में इसे पांच परियोजनाएं दी गई थीं, जिनमें तीन हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजनाएं और दो पंप स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) शामिल हैं। पांचों में से आज एक भी परियोजना पर ट्यूको काम नहीं कर रहा है। चार साल में चार कदम भी नहीं चल पाए। 63 मेगावाट का मोरी-हनोल हाइड्रो प्रोजेक्ट बाद में यूजेवीएनएल को ही दे दिया गया।
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280 मेगावाट का उर्थिंग सोबला और 146 मेगावाट का बुदियार-सरकारी-भ्योल भी जल शक्ति मंत्रालय के पचड़े में फंस गए। दो पीएसपी में से 600 मेगावाट का पुनगढ़-मटियाला पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट और 630 मेगावाट का जसपालगढ़ पंप स्टोरेज प्लांट भी व्यावहारिक न होने के चलते आगे नहीं बढ़ पाया। टीएचडीसी के अधिकारियों का कहना है कि अभी नई संभावनाओं पर काम हो रहा है।