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Uttarakhand : अंब्रेला एक्ट के खिलाफ शिक्षक आंदोलन का मामला, शिक्षक संघ का नामों की सूची देने से इनकार
Mon, 25 Jan 2021 12:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 25 Jan 2021 12:00 PM IST
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आंदोलन में शामिल रहे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश के बाद अशासकीय कॉलेजों में प्रबंधन के निर्देश पर प्राचार्य ने शिक्षक संघ से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं डीएवी व डीबीएस पीजी कॉलेज के शिक्षक संघ ने प्राचार्य को जवाब सौंप दिया है, लेकिन नामों की सूची देने में असमर्थता जताई है। वहीं, अन्य कॉलेजों में भी पत्र भेजे गए हैं।
डीबीएस कॉलेज प्रबंधन ने उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र का संज्ञान लेते हुए प्राचार्य प्रो. वीसी पांडेय से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर प्राचार्य ने शिक्षक संघ से स्पष्टीकरण मांगा। इस पर संघ ने शिक्षकों की तरफ से सामूहिक जवाब लिखित में सौंप दिया है, लेकिन आंदोलन में शामिल शिक्षकों सूची नहीं सौंपी है। वहीं, प्राचार्य ने भी आंदोलन में शामिल शिक्षकों की जानकारी होने से इनकार किया है।
शिक्षकों का जवाब प्रबंधन को भेज दिया है। डीएवी कॉलेज में भी शिक्षक संघ ने प्राचार्य को जवाब सौंप दिया है। उन्होंने भी नामों की सूची नहीं सौंपी। अन्य अशासकीय कॉलेजों में भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ता नजर आ रहा है। प्रबंधन व प्राचार्य के बीच औपचारिकता की जा रही है, लेकिन शिक्षकों के खिलाफ सख्त रूख दिखने की उम्मीद कम है।
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डीएवी पीजी कॉलेज शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. राजेश पाल ने कहा कि न्याय के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। सांकेतिक आंदोलन कुछ मिनट के लिए ही किया गया। शिक्षक तय समय पर ऑनलाइन कक्षाएं देते रहे हैं, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े। प्राचार्य ने शिक्षक संघ से जवाब मांगा गया था, जिसका लिखित जवाब भेज दिया है।
प्रबंधन से पत्र भेजा गया था। जिस पर शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांग लिया है। उनके लिखित जवाब प्रबंधन को भेज दिए हैं। आंदोलन में शामिल शिक्षकों की सूची उपलब्ध होना संभव नहीं है। आंदोलन के समय शिक्षकों ने उन्हें सूचना नहीं दी। उपस्थिति लगाकर कोई शिक्षक कुछ समय के लिए आंदोलन में शामिल हुआ हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता।
-प्रो. वीसी पांडेय, प्राचार्य, डीबीएस पीजी कॉलेज
यह है मामला
अंब्रेला एक्ट के खिलाफ अशासकीय कॉलेजों में शिक्षक कई दिनों तक सांकेतिक धरना देते रहे। राज्य विवि अधिनियम से अनुदान का प्रावधान हटाने को लेकर विरोध जताया गया। इसके बाद शिक्षकों ने सचिवालय कूच भी निकाला था।
इसे लेकर 24 दिसंबर को निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. कुमकुम ने अशासकीय कॉलेजों के प्रबंधन व प्राचार्य को पत्र भेजा था। इसमें आंदोलन में शामिल शिक्षकों पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई करने को कहा था। इसमें शिक्षकों को चिह्नित कर सूची सौंपने के निर्देश दिए थे। वेतन पर रोक लगाने की बात भी कही थी।
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डीबीएस कॉलेज प्रबंधन ने उच्च शिक्षा निदेशक के पत्र का संज्ञान लेते हुए प्राचार्य प्रो. वीसी पांडेय से रिपोर्ट मांगी थी। इस पर प्राचार्य ने शिक्षक संघ से स्पष्टीकरण मांगा। इस पर संघ ने शिक्षकों की तरफ से सामूहिक जवाब लिखित में सौंप दिया है, लेकिन आंदोलन में शामिल शिक्षकों सूची नहीं सौंपी है। वहीं, प्राचार्य ने भी आंदोलन में शामिल शिक्षकों की जानकारी होने से इनकार किया है।
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शिक्षकों का जवाब प्रबंधन को भेज दिया है। डीएवी कॉलेज में भी शिक्षक संघ ने प्राचार्य को जवाब सौंप दिया है। उन्होंने भी नामों की सूची नहीं सौंपी। अन्य अशासकीय कॉलेजों में भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ता नजर आ रहा है। प्रबंधन व प्राचार्य के बीच औपचारिकता की जा रही है, लेकिन शिक्षकों के खिलाफ सख्त रूख दिखने की उम्मीद कम है।
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डीएवी पीजी कॉलेज शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. राजेश पाल ने कहा कि न्याय के लिए आवाज उठाना संवैधानिक अधिकार है। सांकेतिक आंदोलन कुछ मिनट के लिए ही किया गया। शिक्षक तय समय पर ऑनलाइन कक्षाएं देते रहे हैं, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े। प्राचार्य ने शिक्षक संघ से जवाब मांगा गया था, जिसका लिखित जवाब भेज दिया है।
प्रबंधन से पत्र भेजा गया था। जिस पर शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांग लिया है। उनके लिखित जवाब प्रबंधन को भेज दिए हैं। आंदोलन में शामिल शिक्षकों की सूची उपलब्ध होना संभव नहीं है। आंदोलन के समय शिक्षकों ने उन्हें सूचना नहीं दी। उपस्थिति लगाकर कोई शिक्षक कुछ समय के लिए आंदोलन में शामिल हुआ हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता।
-प्रो. वीसी पांडेय, प्राचार्य, डीबीएस पीजी कॉलेज
यह है मामला
अंब्रेला एक्ट के खिलाफ अशासकीय कॉलेजों में शिक्षक कई दिनों तक सांकेतिक धरना देते रहे। राज्य विवि अधिनियम से अनुदान का प्रावधान हटाने को लेकर विरोध जताया गया। इसके बाद शिक्षकों ने सचिवालय कूच भी निकाला था।
इसे लेकर 24 दिसंबर को निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. कुमकुम ने अशासकीय कॉलेजों के प्रबंधन व प्राचार्य को पत्र भेजा था। इसमें आंदोलन में शामिल शिक्षकों पर अनुशासनहीनता की कार्रवाई करने को कहा था। इसमें शिक्षकों को चिह्नित कर सूची सौंपने के निर्देश दिए थे। वेतन पर रोक लगाने की बात भी कही थी।