हरिद्वार में दो करोड़ की लूट : स्पेनिश वेब सीरिज की तरह लूट करता था ताऊ गैंग का सरगना, पुलिस ने किए अहम खुलासे
घटना का खुलासा पुलिस प्रवक्ता अमित सिन्हा, सह प्रवक्ता डीआईजी निलेश आनंद भरणे और डीआईजी रेंज नीरू गर्ग ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस में किया।
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ताऊ गैंग का वर्तमान सरगना सतीश चौधरी स्पेनिश वेब सीरिज (मनी हाइस्ट) की तर्ज पर वारदात को अंजाम देता था। करीब तीन साल पहले वेब सीरिज देखने के बाद उसने लूटपाट का तरीका बदल लिया था। यही कारण रहा कि उसे गैंग के सदस्य के बहुत कम लोग ही जानते थे। हालांकि इससे पहले भी वह कभी पुलिस की पकड़ में नहीं आया।
घटना का खुलासा पुलिस प्रवक्ता अमित सिन्हा, सह प्रवक्ता डीआईजी निलेश आनंद भरणे और डीआईजी रेंज नीरू गर्ग ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस में किया। पुलिस के अनुसार स्पेनिश वेब सीरिज मनी हाइस्ट वर्ष 2017 में नेट फ्लिक्स पर रिलीज हुई थी। कहानी में एक प्रोफेसर चोरी का प्लान बनाता है। इसके लिए वह विभिन्न क्षेत्रों में माहिर लोगों की भर्ती करता है।
प्लान के मुताबिक प्रोफेसर वारदातों को अंजाम देता है, लेकिन वह और उसके साथी कभी लोगों को सामने नहीं आते। इसी तर्ज पर सतीश चौधरी ने भी वारदातों को अंजाम दिया। वह अकेले ही दुकानों की रेकी करता है। इसके लिए लोगों का चुनाव भी खुद ही करता है।
यही नहीं सामान लूटने के बाद उसने बेचने के लिए लिंक भी खुद ही तलाश करता है। बताया जा रहा है कि सतीश की गैंग के पास हथियार तो हैं, लेकिन किसी लूट में उन्होंने बहुत बड़ा नुकसान किसी व्यक्ति विशेष को नहीं पहुंचाया।
दर्जनभर मुकदमे पर किसी के हाथ नहीं आया
ताऊ गैंग के सरगना इंद्रपाल चौधरी के जेल जाने के बाद सतीश ही मुखिया बन गया था। सतीश चौधरी का नाम गैंग के गिने चुने लोग ही जानते थे। ऐसे में यदि कोई पकड़ा भी जाता था तो उसका नाम यदा कदा ही पुलिस को पता लग पाता था।
उस पर हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 11 मुकदमे दर्ज हैं। मगर, वह किसी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया। इस बार उत्तराखंड पुलिस के हरिद्वार, एसटीएफ और रेंज स्तर पर गठित की गई टीमों ने सतीश को दबोच लिया।
टिंटेड ग्लास उतार दिया होता तो न होती घटना
पूछताछ में सतीश ने बताया कि उसने डेढ़ साल पहले तारा मोरा और एक अन्य ज्वेलर की दुकान की रेकी की थी। उस वक्त दोनों दुकानों के बाहरी शीशे पर काली फिल्म (टिंटेड ग्लास) चढ़ी हुई थी। वह ऐसी दुकानों को इसलिए चुनता है क्योंकि इनमें बाहर से अंदर कोई नहीं देख सकता। इस दरम्यान दूसरे ज्वेलर ने तो अपनी दुकान से टिंटेड ग्लास उतरवा दिए। मगर, तारा मोरा के यहां अब भी वही ग्लास (शीशे) थे। ऐसे में योजना काम कर गई। यदि तारा मोरा भी दूसरे दुकानदार की तरह टिंटेड शीशे उतरवा देते तो उनके यहां घटना होने न होती।
48 घंटों में पुलिस की टीमों ने इस बड़ी घटना का खुलासा किया है। अब तक इसमें रिकवरी भी लगभग पूरी की जा चुकी है। हरिद्वार पुलिस के साथ-साथ एसटीएफ भी अन्य पहलुओं पर इसकी पड़ताल कर रही है। साथ ही जहां तक लूटे गए माल की बरामदी के प्रयास किए जा रहे हैं।
-आईजी अमित सिन्हा, प्रवक्ता, उत्तराखंड पुलिस