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उत्तराखंड: 17 साल बाद बलवे के आरोप से सूर्यकांत धस्माना बरी, छह लोगों के खिलाफ था मुकदमा

Mon, 08 Nov 2021 08:02 PM IST
अलका त्यागी संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 08 Nov 2021 08:02 PM IST
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Uttarakhand News: Suryakant Dhasmana acquitted from Balwa case after 17 years
कांग्रेस के नेता सूर्यकांत धस्माना - फोटो : फाइल फोटो

राजमार्ग जाम करने और बलवा करने के आरोपों से उत्तराखंड कांग्रेस के नेता सूर्यकांत धस्माना को 17 साल बाद बरी कर दिया गया है। एसीजेएम तृतीय की कोर्ट में अभियोजन यह साबित करने में असफल हुआ कि धस्माना उस तिथि में मौके पर मौजूद थे भी या नहीं। इसी संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने उन्हें ससम्मान दोषमुक्त कर दिया। 

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यह घटना नौ जून 2004 की है। सूर्यकांत धस्माना के अधिवक्ता केके गोयल ने बताया कि पुलिस ने सपना कुंवर, विमला थापा, सूर्यकांत धस्माना, मनोरमा गुरुंग, राजेंद्र गुरुंग और नरेंद्र क्षेत्री के खिलाफ बलवा और राजमार्ग जाम करने का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस का कहना था कि यह सभी लोग अन्य 150 लोगों के साथ दिलाराम चौक से हाथीबड़कला की ओर जाते हुए सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे। इस दौरान उन्हें वहां रोका गया तो उन्होंने राजमार्ग जाम कर दिया। 
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इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। मुकदमे विचारण के दौरान विमला थापा की मौत हो गई। इसके कारण उनके खिलाफ कोर्ट की कार्यवाही बंद कर दी गई। सूर्यकांत धस्माना के अलावा बाकी अन्य आरोपियों ने अपना जुर्म इकबाल कर लिया। इसके चलते उनके खिलाफ चल रहे मामले का वर्ष 2009 में निपटारा किया गया।


अब केवल सूर्यकांत धस्माना के संबंध में ही ट्रायल चल रहा था। इस बीच कोर्ट में मुकदमे के विवेचना अधिकारी, तत्कालीन सीओ मसूरी आदि अधिकारियों के बयान दर्ज कराए गए थे। जिरह के दौरान अभियोजन के किसी भी गवाह ने सूर्यकांत धस्माना के मौके पर होने की पुष्टि नहीं की।

सभी ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि जुलूस का नेतृत्व कौन कर रहा था। ऐसे में कोर्ट ने माना कि इस बात में संदेह है कि सूर्यकांत धस्माना मौके पर थे। इस संदेह का लाभ देते हुए सूर्यकांत धस्माना को कोर्ट ने बरी करने के आदेश दे दिए।

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