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उत्तराखंड: सुंदरवन के पौधों की जड़ों में विसर्जित की गई सुंदरलाल बहुगुणा की अस्थियां
Tue, 25 May 2021 12:01 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 25 May 2021 12:01 AM IST
सार
चिपको आंदोलन के प्रणेता और विख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना संक्रमण के कारण 21 मई को निधन हो गया था।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जीवनभर पेड़ों को बचाने की लड़ाई लड़ने वाले सुंदरलाल बहुगुणा आखिरकार उन्हीं पेड़ों में विलीन हो गए। वन, पर्यावरण के प्रति उनके प्रेम को देखते हुए उनकी अस्थियां सुंदरवन में पेड़ों की जड़ों में विसर्जित की गई। यहां 2010 में उन्होंने खुद पहला पौधा लगाया था, जो आज घने जंगल के रूप में बदल चुका है।
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2009 से 2011 के दौरान उन्होंने शुक्लापुर में प्रवास किया था। 2010 में करीब पांच हेक्टेयर जमीन में उनके सम्मान में सुंदर वन-फूड पार्क फॉर वाइल्ड एनिमल्स की स्थापना की गई थी। तब उन्होंने पहला पौधा लगाकर उस जंगल की नींव रखी थी।
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आज वहां एक घना और हराभरा जंगल आकार ले चुका है। वहां न केवल सैकड़ों तरह के पेड़-पौधे हैं बल्कि कई प्रजातियों की पक्षियां और वन्य जीव भी हैं। सोमवार को पर्यावरणविद् पद्मभूषण डा. अनिल जोशी ने उनकी अस्थियों को पौधों को समर्पित कर दिया।
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उन्होंने कहा कि यहां जल छिद्र भी बनाए गए हैं ताकि बहने वाली नदी को पानी मिलता रहे। उन्होंने कहा मैं वन पर्यावण के लिए काम करने वाले सब लोगों की ओर से उनकी अस्थियां विसर्जित कर रहा हूं। 2010 में वन विभाग व अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर स्व. बहुगुणा ने जिस वन की परिकल्पना की, उसे मैं आज सब को समर्पित कर रहा हूं।
इस वन का महत्व इसलिए अचानक बढ़ जाता है क्योंकि इसमें एक महान व्यक्ति की अस्थियां विसर्जित की गई हैं। डा. जोशी ने कहा कि गुरुजी ने एक सूखी और बंजर जमीन पर हराभरा वन तैयार करने की जो कल्पना की थी, वह अब साकार रूप ले चुकी है।