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Uttarakhand News : अदरक, हल्दी की प्रजातियों को संरक्षित करने में जुटे वैज्ञानिक
Sat, 09 Jan 2021 03:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sat, 09 Jan 2021 03:01 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
उत्तराखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों में पायी जाने वाली अदरक की छह और हल्दी की पांच प्रजातियों के विलुप्त होने की आशंकाओं के बीच भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वनस्पति विज्ञानी इन प्रजातियों को संरक्षित करने में जुट गए हैं।
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अदरक और हल्दी की प्रजातियों को संरक्षित किया जा सके इसके लिए भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण संस्थान परिसर में जिंजर गार्डन तैयार किया गया है। इसमें अदरक और हल्दी की प्रजातियों को सुरक्षित करने के साथ ही कई अन्य प्रजातियों की वनस्पतियों को भी संरक्षित किया जा रहा है।
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वरिष्ठ वनस्पति विज्ञान एवं भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि अदरक की प्रजातियों में शामिल जिंजर किवाकरियानम, जिंजर मोंटसम और जिंजर निमोनी जैसी अदरक की कई ऐसी छह प्रजातियां हैं जो उत्तराखंड समेत देश के तमाम राज्यों में तेजी से खत्म हो रही हैं। ऐसे में अदरक की इन प्रजातियों को संरक्षित करने को लेकर कार्य योजना तैयार की गई है।
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अदरक के साथ ही हल्दी की पांच प्रजातियों को भी संरक्षित करने को लेकर योजना तैयार की गई है। डॉ. एसके सिंह के मुताबिक अदरक और हल्दी की प्रजातियों को संरक्षित किया जा सके इसके लिए संस्थान परिसर में जिंजर गार्डन तैयार किया गया है।
गार्डन में अदरक और हल्दी के अलावा कई अन्य प्रकार की वनस्पतियों को भी संरक्षित किया जा रहा है। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के विशेषज्ञों के मुताबिक हल्दी और अदरक की जिन प्रजातियों को संरक्षित किया जा रहा है। इनमें से कई प्रजातियों को उत्तर पूर्व के राज्यों से लाया गया है।