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नजीबाबाद हादसा: खल गया सच्ची कोरोना योद्धा तहसीलदार सुनैना राणा का यूं चले जाना, सीएम ने जताया शोक

Mon, 12 Oct 2020 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, रुड़की Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 12 Oct 2020 01:00 AM IST
सार

  • कंटेनमेंट जोन के नोडल इंचार्ज के रूप में तहसीलदार सुनैना राणा ने किया था शानदार काम 
  • गली-गली में बल्लियां लगाकर लोगों को जागरूक करने के साथ उनकी समस्याएं भी दूर कीं

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uttarakhand news: roorkee tehsildar sunaina rana government vehicle fell in to canal
तहसीलदार सुनैना राणा - फोटो : File Photo

विस्तार

युवा और जुझारू तहसीलदार सुनैना राणा सही मायने में कोरोना योद्धा थीं। उनका यूं चले जाना शहरवासियों को खल गया। जिस वक्त शहर में कोरोना संक्रमण और कंटेनमेंट जोन का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा था, बतौर कंटेनमेंट जोन नोडल इंचार्ज उन्होंने बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई।

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एक-एक गली में घूमकर न केवल लोगों को समझाया बल्कि दिक्कतों को भी दूर कर उनका दिल जीत लिया। इसके अलावा भी उनके कई सारे कार्य ऐसे हैं, जो अब लोगों की यादों में ही जिंदा हैं। तहसीलदार सुनैना राणा के सड़क हादसे में आकस्मिक निधन से हर कोई स्तब्ध है। करीब पांच महीने पहले लक्सर से रुड़की स्थानांतरित होकर आईं तहसीलदार सुनैना राणा ने कार्यभार संभालते ही बड़ी जिम्मेदारियों को अपना लिया।
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उन्होंने तहसील के विभिन्न कार्यों को गति दी तो कोरोना काल में अपने कार्यों से खूब प्रशंसा बटोरी। उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें कोरोना काल में रुड़की में कंटेनमेंट जोन का नोडल इंचार्ज बनाया गया। जहां भी कोरोना के केस मिले, वहां जिला प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार, कंटेनमेंट जोन बनाकर बल्लियां लगवाईं। लोगों को जागरूक करने के साथ  उनकी समस्याओं का समाधान भी कराया।
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नमामी बंसल बताती हैं कि बतौर कंटेनमेंट जोन इंचार्ज उन्होंने कड़ी मेहनत की और सभी कार्यों को बखूबी किया। इसके अलावा पिरान कलियर में वर्षों से अटकी बेशकीमती भूमि की हदबंदी का काम पूरा कराया। आशंका जताई जा रही थी कि हदबंदी होती है तो बड़ा संघर्ष हो सकता है। कुछ संगठनों ने धरना प्रदर्शन भी किया था, लेकिन तहसीलदार ने बेहद संजीदगी के साथ इस काम को पूरा कराया।

हादसे में तहसीलदार समेत तीन की मौत, सीएम ने जताया शोक

रुड़की की तहसीलदार सुनेना राणा, वाहन चालक सुंदर व अर्दली ओमपाल की सड़क हादसे में मौत हो गई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनके आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने दिवंगतों की आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

काम की शैली की अधिकारियों और कर्मचारियों में थी चर्चा 

‘नाजिर जी! फाइल छोड़ जाओ, कुछ देर बाद ले जाना, मैं पढ़ने के बाद साइन करती हूं।’ कुछ इस तरह काम करने की शैली थी तहसीलदार सुनैना राणा की। बताया जाता है कि तहसीलदार हर काम को बारीकी से जांच पड़ताल के बाद करती थीं। इसलिए उनके आदेशों पर तेजी से अमल भी होता था। 

रुड़की तहसील के नाजिर अनिल कुमार बताते हैं कि बतौर अधिकारी तहसीलदार सुनैना राणा से काफी कुछ सीखने को मिला है। उनका काम करने का ढंग अलग था। वे किसी भी फाइल पर सीधे साइन करने में विश्वास नहीं रखती थीं। उन्होंने बताया कि उनके साथ ऐसा कई बार हुआ, जब वे तहसीलदार के पास फाइल लेकर जाते थे और वह व्यस्त होती थीं तो बिना पढ़े कभी साइन नहीं करती थीं।

दूसरी गाड़ी में आगे चल रहे हरिद्वार के तहसीलदार मंजीत सिंह सुनैना राणा को लेकर बेहद फिक्रमंद थे। रात को नजीबाबाद में उन्होंने राणा से बात कर पूछा था कि आप क्या पीछे खाने पीने के लिए रुक रहे हैं। जवाब आया कि आप चलो मैं आ रही हूं, लेकिन फिर वे पहुंची ही नहीं। तहसीलदार मंजीत सिंह को यह पता नहीं था कि फिर कभी सुनैना राणा से बात नहीं हो पाएगी।

तहसीलदार सुनैना राणा के निधन से पहले हर पल के गवाह रहे हरिद्वार के तहसीलदार मंजीत सिंह शायद ही इस घटना को कभी अपने जेहन से निकाल पाएंगे। वह बताते हैं कि मैडम की गाड़ी पीछे-पीछे ही चल रही थी। रात करीब साढ़े आठ बजे नजीबाबाद में उन्हें लगा कि मैडम की गाड़ी दिखाई नहीं दे रही है तो उन्होंने फोन पर उनसे बात भी की। उन्होंने आगे चलने के लिए कहा तो वे चल पड़े।

धीरे-धीरे श्यामपुर तक पहुंचे तो फिर फोन मिलाया, लेकिन फोन न तो ऑफ आ रहा था और न ही घंटी जा रही थी। फोन आउट ऑफ रीच बताने लगा तो उनकी चिंता बढ़ने लगी थी। जब वे चंडी पुल पर पहुंचे तो गाड़ी रोक दी और इंतजार करने लगे, लेकिन आधे घंटे बाद भी राणा की गाड़ी नहीं पहुंची तो उन्हें किसी अनहोनी की चिंता सताने लगी। इसके बाद वही हुआ, जो उन्होंने कभी सोचा तक नहीं था। 

शक होने पर निकाली मोबाइल लोकेशन

एसपी देहात एसके सिंह ने बताया कि तहसीलदार सुनैना राणा की कार के आगे हरिद्वार तहसीलदार मंजीत सिंह और आशीष घिल्डियाल की गाड़ी थी। दोनों ने सुनैना राणा की कार पीछे नहीं देखी तो शक हुआ। उन्होंने गाड़ी रोककर उनके मोबाइल पर कॉल की नंबर नहीं लगा। इस पर मामले की सूचना एसपी देहात एसके सिंह को दी गई। उन्होंने आननफानन में तहसीलदार के मोबाइल की लोकेशन निकाली तो नजीबाबाद के पास नहर की पटरी पर मिली। 

रेलिंग टूटने पर नहर में गाड़ी गिरने का हुआ शक

एसपी देहात ने बताया कि जहां की लोकेशन थी, वहां हरिद्वार के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे, लेकिन कुछ नहीं मिला। इस पर फिर से उनके मोबाइल की लोकेशन निकाली गई। दोबारा लोकेशन वहीं की मिली। इस पर उनकी गाड़ी लापता होने का मामला उलझ गया। इस बीच मौके पर पुलिस को नहर की पटरी की रेलिंग टूटी मिली। शक हुआ कि गाड़ी नहर में गिरी है। इस पर मौके पर गोताखोरों को बुलाया गया। गोताखोरों ने नहर में तलाश की तो शक सही निकला। 

यह मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति के साथ समूचे तहसील प्रशासन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने काम से सभी का दिल जीता था। बतौर कंटेनमेंट नोडल इंचार्ज उन्होंने बहुत शानदार काम किया। पूरा तहसील प्रशासन दुख की घड़ी में परिवार के साथ है।
-नमामी बंसल, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, रुड़की 

तहसीलदार सुनैना राणा की असामयिक मौत की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। मेरे साथ कई मौके पर काम किया। इस तरह के अधिकारी की प्रशंसा के लिए हर शब्द अपने आप में कम है। अपने स्वभाव और कार्यशैली के चलते वे हमेशा सभी की यादों में जिंदा रहेंगी। 
-नूपुर वर्मा, नगर आयुक्त रुड़की 

पति हैं दून में लेक्चरार

तहसीलदार सुनैना राणा के पति देहरादून के एक कॉलेज में लेक्चरार हैं जबकि उनके छोटे-छोटे बेटे हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पति और रिश्तेदार आननफानन में घटनास्थल पर पहुंचे।

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