Uttarakhand: रुद्रपुर में जहरीली गैस का रिसाव, एसडीएम समेत 47 लोगों की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में आईसीयू फुल
बेहोश हुए लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां आईसीयू वार्ड भी फुल हो गया है। घटना के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
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विस्तार
उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में ट्रांजिट कैंप के आजाद नगर की घनी आबादी के बीच मंगलवार सुबह एक कबाड़ के गोदाम से जहरीली गैस का रिसाव होने से 47 से ज्यादा लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। लोगों की बिगड़ती तबीयत की जानकारी होने ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। मौके पर फोर्स के साथ पहुंचे एसडीएम, सीओ, सीएफओ आदि भी गैस के संपर्क में आने से बीमार हो गए। हालांकि जिला अस्पताल में उपचार के बाद सभी के स्वास्थ्य में सुधार है। पुलिस ने गैस लीकेज मामले में कबाड़ी पर धारा 307 और 278 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
सिलिंडर से फैली जहरीली गैस: आबादी के बीच एक-एक कर बेहोश होने लगे लोग, हालत देख दहशत में आए क्षेत्रवासी
मंगलवार सुबह करीब छह बजे आजाद नगर में जहरीली गैस के रिसाव की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। कबाड़ के जिस सिलिंडर से रिसाव हो रहा था, उसे आबादी से दूर ले जाकर डिस्पोज करने का प्रयास शुरू किया गया। सिलिंडर ले जाने के लिए पहले छोटा हाथी (टाटा एसीई) फिर ई-रिक्शा वाले ने भी सिलिंडर ले जाने से इनकार कर दिया। इस बीच एक ई-रिक्शा चालक के तैयार होने पर सिलिंडर को दूर ले जाकर एक खेत के पास छोड़ दिया गया।
इस दौरान सिलिंडर एसडीएम किच्छा कौस्तुभ मिश्रा, सीओ यातायात आशीष भारद्वाज, मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव, तहसीलदार नीतू डागर समेत एसडीआरएफ के चार कर्मचारियों को भी सांस लेने में दिक्कत होने लगी। उन्हें आपातकालीन स्थिति में जिला अस्पताल ले जाया गया। साथ ही आजाद नगर के करीब 36 लोगों को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। इस दौरान एडीएम डॉ. ललित नारायण मिश्र, सीएमओ डॉ. सुनीता चुफाल रतूड़ी, एसीएमओ डॉ. हरेंद्र मलिक, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश सिन्हा आदि मौजूद थे।
आईसीयू वार्ड फुल
बेहोश हुए लोगों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां जिला अस्पताल का आईसीयू वार्ड भी फुल हो गया है। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, युगल किशोर पंत व एसएसपी डॉ मंजूनाथ टीसी अस्पताल में बेहोश मरीजों का हाल जानने पहुंचे।
लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन
गैस रिसाव होने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ट्रांजिट कैंप से कबाड़ के गोदाम हटाने की मांग की। इसे लेकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
कबाड़ी पर दर्ज हुआ धारा 307 के तहत मुकदमा
क्लोरीन गैस लीकेज मामले में कबाड़ी पर धारा 307 व 278 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी कबाड़ी फरार बताया जा रहा है।
गड्ढे में दफनाया गया गैस सिलेंडर
जहरीली गैस का रिसाव रोकने के लिए गैस सिलेंडर को आबादी से दूर जंगल की तरफ ले जाया गया, जहां एक खुले खेत में गड्ढा खोदकर सिलेंडर दफनाया गया है। जिससे सिलेंडर के रिसाव से तात्कालिक रूप से मुक्ति मिली है।
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- Fire Service Uttarakhand Police (@UttarakhandFireService) 30 Aug 2022
मुर्गियां और चूहे मरे, पौधे भी मुरझाए
जहरीली गैस के रिसाव से लोगों की तबीयत बिगड़ने के साथ पशु-पक्षियों व वनस्पति को भी नुकसान पहुंचा। गैस रिसाव की घटना के बाद क्षेत्र में कई जगहों पर चूहे मरे हुए पाए गए जबकि कुछ मुर्गियों की भी मौत हो गई। गोदाम के पास स्थित एक मकान के गमले के हरे पौधे भी गैस के संपर्क में आने से झुलसकर मुरझा गए। कुछ घरों में पीतल के बर्तन भी काले पड़ गए।
मंगलवार को गैस रिसाव की घटना के बाद आबादी क्षेत्र से कबाड़ के गोदाम को हटाने की मांग के लिए आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि आबादी क्षेत्र में खुलेआम कबाड़ गोदाम चल रहा है। इसकी शिकायत कई बार अधिकारियों से की गई लेकिन किसी ने उनकी न सुनीं। इधर गोदाम से सिलिंडर को निकालकर दूरस्थ स्थान पर जमीन में दबाने के बावजूद दोपहर तक आजाद नगर में गैस की दुर्गंध आती रही। इस कारण दोपहर तक भी अपने घरों में नहीं आए जबकि घरों में मौजूद लोग अपने मुंह को कपड़े से ढके रहे। गैस के संपर्क में आने से मुर्गियों की मौत के बाद भी लोगों में दहशत रही।
बोले विशेषज्ञ
इस सिलिंडर में पुरानी क्लोरीन गैस हो सकती है। अधिकतर जहरीली गैसों में कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, फास्जीन व क्लोरीन शामिल है। इनके रिसाव से बेहोशी के साथ ही अत्यधिक मात्रा के शरीर में पहुंचने से मौत भी हो सकती है। वेल्डिंग सिलिंडरों में आर्गन, हीलियम, कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन का मिश्रण होता है जो जहरीली गैसों की श्रेणी में आती हैं।
- डॉ. दयालशरण शर्मा, संयुक्त निदेशक, फोरेंसिक लैब
सांस नली के लिए क्लोरीन गैस बहुत खतरनाक है। उच्च सांद्रता में क्लोरीन अंदर लेने से क्लोरीन की तरल बूंदें शरीर में प्रवेश करती हैं। यह ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के भीतर तरल पदार्थ बनाता है। इससे खांसी, सांस लेने में कठिनाई और सीने में जकड़न जैसे लक्षण हो सकते हैं। क्लोरीन गैस आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे आंखों में जलन की शिकायत के साथ ही अंधापन भी हो सकता है।
डॉ. भारत पांडेय, सहायक प्रोफेसर रसायन विज्ञान, रुद्रपुर कॉलेज