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फूलों की घाटी: खूबसूरत वादियों के बीच खिले हैं कई जहरीले फूल, बिना जानकारी छूने से बचें

Wed, 25 Aug 2021 02:24 AM IST
अलका त्यागी प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, गोपेश्वर
प्रमोद सेमवाल, अमर उजाला, गोपेश्वर Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 25 Aug 2021 02:24 AM IST
सार

फूलों की घाटी ग्रीष्मकाल में छह माह तक पर्यटकों के लिए खोली जाती है। घाटी में 350 से अधिक प्रजातियों के फूल खिलते हैं।

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Uttarakhand News: Poisonous Flowers bloom in valley of flowers
फूलों की घाटी - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी के दीदार को जा रहे हैं तो सावधान रहें। घाटी में कई विषैले फूल भी खिले हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। वन विभाग ने भी पर्यटकों को बिना जानकारी किसी भी फूल या वनस्पति से छेड़छाड़ न करने की सलाह दी है। 

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फूलों की घाटी ग्रीष्मकाल में छह माह तक पर्यटकों के लिए खोली जाती है। घाटी में 350 से अधिक प्रजातियों के फूल खिलते हैं। घाटी के दीदार के लिए अगस्त और सितंबर माह सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान घाटी में सबसे ज्यादा फूल खिले रहते हैं।
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मौजूदा समय में 200 से अधिक प्रजातियों के फूल घाटी में खिले हुए हैं। वन विभाग ने घाटी में एकोनिटम बालफोरी और सेनेसियो ग्रैसिलिफ्लोरस नाम के फूल चिह्नित किए हैं, जो काफी जहरीले होते हैं। सेनेसियो एक दुर्लभ प्रजाति का फूल भी है, जो लंबे समय बाद घाटी में खिला है। किसी ने यदि यह फूल तोड़ लिया या इसको मुंह में रख लिया तो यह जानलेवा हो सकता है। 

घाटी में खिले दुर्लभ प्रजाति के फूल
फूलों की घाटी में कई दुर्लभ प्रजाति के फूल खिले हुए हैं। इनमें सबसे मनमोहक फूल मोरिना लोंगिफोलिया है। यह दूर-दूर तक अपनी महक छोड़ता है। इसके अलावा घाटी में विलुप्तप्राय श्रेणी में रखे गए कोरीडालिस कॉर्नुटा फूल भी खिले हुए हैं। इसके अलावा घाटी में विभिन्न प्रजातियों के फूल खिले हुए हैं। 

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ब्रह्मकमल से महक रही घाटी 

फूलों की घाटी से लेकर हेमकुंड साहिब तक जगह-जगह ब्रह्मकमल खिले हुए हैं। पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा बंद है। मानवीय आवाजाही कम होने से यहां ब्रह्मकमल बहुतायत में खिले हुए हैं। ब्रह्मकमल हेमकुंड के आस्था पथ पर भी खिले हुए हैं। यात्रा के दौरान ब्रह्मकमल का बड़ी मात्रा में दोहन हो जाता था, लेकिन इस बार यात्रा का संचालन न होने से घांघरिया से कुछ दूरी से ही ब्रह्मकमल दिखाई दे रहे हैं।
 

फूलों की घाटी जैव विविधता से भरी है। यहां कई प्रजाति के फूल और वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनमें कई दुर्लभ प्रजाति के फूल भी हैं। घाटी में दो ऐसे फूलों को चिन्हित किया गया है, जो विषैले हैं। पर्यटकों को घाटी में प्रवेश करने पर सावधानी बरतनी चाहिए, किसी भी वनस्पति को छूने या तोड़ने से बचना चाहिए। 
- अमित कंवर, निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व, गोपेश्वर, चमोली। 

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