उत्तराखंडः मनोकामनाओं की पूर्ति और पुण्य कमाने के साथ ट्रैकिंग के रोमांच देने वाली है पंचकोसी वारुणी यात्रा
- पंचकोसी वारुणी यात्रा में की जाती है वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा
- इस बार आठ अप्रैल को आयोजित की जाएगी वारुणी यात्रा
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मनोकामनाओं की पूर्ति और पुण्य कमाने के साथ ही चीड़, देवदार, बांज, बुरांस के घने जंगलों के बीच 15 किमी की ट्रैकिंग के रोमांच का लुत्फ लेना है तो उत्तरकाशी चले आईए। सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार हर साल चैत्र मास की त्रयोदशी को यहां पंचकोसी वारुणी यात्रा के तहत वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा की जाती है। इस बार आठ अप्रैल को वारुणी यात्रा का आयोजन किया जाना है।
असी गंगा, वरुण गंगा और गंगा भागीरथी से घिरे वरुणावत पर्वत की तलहटी में उत्तरकाशी नगर बसा हुआ है। यहां हर साल चैत्र मास की त्रयोदशी को वारुणी यात्रा का आयोजन किया जाता है। जिसमें श्रद्धालु पौराणिक मणिकर्णिका घाट एवं बड़ेथी चुंगी में वरुण गंगा और गंगा भागीरथी के संगम पर स्नान कर पदयात्रा शुरू करते हैं। यह यात्रा बसूंगा, साल्ड, ज्ञाणजा, वरुणावत के शीर्ष, संग्राली, पाटा होते हुए गंगोरी में असी गंगा और गंगा भागीरथी के संगम पर पहुंचती है। यहां संगम पर स्नान कर श्रद्धालु उत्तरकाशी नगर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर समेत तमाम मंदिरों में पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
इस यात्रा में श्रद्धालुओं को करीब 15 किमी की दूरी पैदल तय करनी होती है। वरुणावत पर्वत की परिक्रमा का ट्रैक चीड़, देवदार, बांज, बुरांस के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरता है। वरुणावत शीर्ष से हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों का विहंगम दृश्य देखने लायक होता है। बीते सालों में इस यात्रा के प्रति लोगों का आकर्षण बहुत बढ़ गया है। यही कारण है कि वारुणी यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दौरान यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले गांवों में श्रद्धालुओं की विशेष आवभगत एवं जलपान की व्यवस्था की जाती है।
वारुणी यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले प्राचीन मंदिर
पंचकोसी वारुणी यात्रा मार्ग पर बड़ेथी संगम पर वरुणेश्वर महादेव, बसूंगा में बासू कंडार, साल्ड में जगन्नाथ एवं अष्टभुजा ज्वाला देवी, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर महादेव एवं व्यास कुंड, वरुणावत शीर्ष पर शिखरेश्वर, राजराजेश्वरी एवं विमलेश्वर महादेव, संग्राली में कंडार देवता, पाटा में नर्मदेश्वर महादेव, गंगोरी त्रिवेणी घाट पर गंगेश्वर, लक्षेश्वर, उज्ज्वला देवी, महिषासुर मर्दिनी, कंडार देवता, परशुराम, अन्नपूर्णा, भैरव, गोपेश्वर महादेव, शक्ति मंदिर, हनुमान मंदिर, कीर्तेश्वर महादेव, काशी विश्वनाथ एवं मणिकर्णिका घाट स्थित गंगा मंदिर पड़ते हैं।
पंचकोसी वारुणी यात्रा का है बड़ा धार्मिक महत्व
वारुणी यात्रा पर पुस्तक लिखने वाले संग्राली गांव निवासी पं.शिवानंद भट्ट बताते हैं कि अनादि काल से चली आ रही इस धार्मिक यात्रा का उल्लेख पदम पुराण में मिलता है। वरुणावत पर्वत को भगवान का निवास स्थान माना जाता है।
पुराणों में यहां भगवान परशुराम एवं महर्षि वेदव्यास द्वारा तपस्या किए जाने का उल्लेख है। उपवास रखकर नंगे पैर पैदल पंचकोसी वारुणी यात्रा करने से मनोकामनाएं पूरी होने के साथ ही सौ यज्ञों का पुण्य फल प्राप्त होता है, ऐसी मान्यता है।