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एक्सक्लूसिव : उत्तराखंड की नम भूमि का भी होगा अपना बही खाता, तालाब, जोहड़, झील, ताल की होगी पहचान
Mon, 07 Dec 2020 12:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 07 Dec 2020 12:55 PM IST
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asan barrage
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प्रदेश की नम (जलीय) भूमि का भी अब अपना बही खाता होगा। वन विभाग और राजस्व विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में न सिर्फ इनके प्रमाणिक दस्तावेज बनेंगे बल्कि ये दोनों विभाग धरातल पर जीआई टैग के साथ ही इनका सत्यापन भी करेंगे।
प्रदेेश सरकार की इस इस मुहिम के लिए हाल ही में मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने राजस्व, कैंपा और ग्राम्य विकास को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए थे। योजना के तहत प्रदेश के सभी वैटलैंड नम भूमियों का सत्यापन धरातल पर किया जाएगा। मतलब यह कि विभाग के कर्मी बकायदा मौके पर पहुंचेंगे। भू आलेखों की पड़ताल करके नम भूमि के लिए अलग से रिकार्ड तैयार करेंगे। अभी तक प्रदेश में नम भूमि का रिकार्ड एक सेटेलाइट और गूगल सर्वे पर ही आधारित है।
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एनजीटी और हाईकोर्ट का भी है आदेश
इस योजना के पीछे कहीं न कहीं एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेश का भी दबाव है। हाईकोर्ट में कुंवर पाल के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश में जोहड़, तालाब आदि की पहचान करने के निर्देश दिए थे। इसी तरह नम भूमि पर एनजीटी का आदेश है।
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राजस्व विभाग आद्र भूमि के दस्तावेजीकरण का काम करेगा। आद्र भूमि के रिकार्ड में प्रमाणिक सेजरा रिपोर्ट भी लगाई जाएगी। धरातलीय निरीक्षण किया जाएगा। जल्द ही इस मामले में शासनादेश भी जारी किया जा रहा है।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व
क्या होते हैं वेटलैंड
जलमग्न भूमि या आर्द्र भूमि अत्यधिक नमी वाली भूमि हैं। प्रदेश में आसन वैटलैंड को हाल ही में रामसार साइट का दर्जा भी दिया गया था। इसी तरह प्रदेश में कई और क्षेत्र भी हैं। झीलों केे साथ ही बड़े तालाब, जोहड़, पर्वतीय क्षेत्र में पानी वाले धान के क्षेत्र जिन्हें सिमार कहा जाता है, आदि भी आर्द्र भूमि में परिभाषित किए जाते हैं।
क्या है इनकी उपयोगिता
आर्द्र भूमि का अपना पारिस्थितिकीय तंत्र होता है। इसमें जलीय जीवों से लेकर पेड़, पौधे तक पनपते हैं। पानी को संरक्षित करने से लेकर भूमिगत जल में भी इनकी भूमिका होती है। मसलन टिहरी बांध सहित अन्य बांध भी वेटलैंड माने जाते हैं।
क्या स्थिति है अभी तक
यूूसेक अहमदाबाद और वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड ने कुछ समय पहले ही उत्तराखंड के वेटलैंड का सर्वे किया था। यह सेटेलाइट और गूगल आधारित सर्वे था। इससे यह तो पता लगा कि प्रदेश में कहां-कहां वेटलैंड हैं लेकिन धरातल पर तस्वीर उभर कर सामने नहीं आई।