उत्तराखंड: पिंडर नदी में डूबे एक किशोर का शव बरामद, दूसरे की तलाश में जुटी एसडीआएफ की टीम
- बृहस्पतिवार को घर से ट्यूशन पढ़ने गए दो किशोर लापता हो गए थे। जब वे देर तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी खोज की। इस दौरान पिंडर नदी किनारे दोनों के कपडे़, किताबें और चप्पलें मिलीं।
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उत्तराखंड के चमोली जिले में नारायणबगड़ के पंती में पिंडर नदी में डूबे दो किशोरों में से एक का शव शुक्रवार को बरामद किया गया। जबकि गोताखोर, एसडीआरएफ और पुलिस के जवान दूसरे किशोर की खोज में नदी किनारे जुटे हैं। घटना से क्षेत्र में शोक की लहर है।
बृहस्पतिवार को घर से ट्यूशन पढ़ने गए दो किशोर लापता हो गए थे। जब वे देर तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी खोज की। इस दौरान पिंडर नदी किनारे दोनों के कपडे़, किताबें और चप्पलें मिलीं। इस पर दोनों छात्रों प्रियांशु नेगी (13) और गजेंद्र सेनवाल (14) के नदी में डूबने की आशंका जताई गई थी।
काफी खोज के बाद भी दोनों का कोई पता नहीं चल पाया तो पुलिस को सूचना दी गई। जिस पर गोताखोरों की टीम भी साथ में पहुंची। शुक्रवार को करीब 11.47 बजे घटनास्थल के पास गजेंद्र सेनवाल का शव जल पुलिस ने बरामद किया।
पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। थानाध्यक्ष ध्वजवीर सिंह पंवार ने कहा कि खोज अभियान शनिवार को भी जारी रहेगा। इस दौरान एसडीआरएफ के सूबेदार सचिन रावत, एसआई विनोद चौरसिया, संतोष सिंह, अजय डोभाल, जल पुलिस के जवान प्रदीप नेगी, विपिन कुमार, राजेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह मौजूद थे।
पंती में पिंडर नदी में बहकर तीन किशोर और एक बालिका की हो चुकी मौत
पंती में पिंडर नदी किनारे के दो किशोरों के लापता होने के बाद एक का शव मिलने से पूरा गांव गमगीन है। लोगों का कहना है कि जहां पर यह घटना हुई है वहां नदी में तेज भंवर है। इस भंवर में अभी तक तीन किशोर और एक बच्ची की मौत हो चुकी है।
नारायणबगड़ में बड़े आयोजनों और विशेषकर बैसाखी मेले के दौरान इस स्थान पर प्रशासन की ओर से पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया जाता है ताकि कोई भी नदी के किनारे न जा सके। पंती के ग्राम प्रधान रमेश गुर्साइं ने कहा कि करीब 10 साल पहले भी इस जगह पर बैसाखी मेला देखने आए तीन किशोर डूबे थे।
उसके दूसरे ही साल बैसाखी के ही दिन एक बालिका (9) बही थी। साथ ही चार-पांच साल पहले एक महिला भी पैर फिसलने से डूब गई थी। स्थानीय लोग पिंडर नदी में हो रही ऐसी घटनाओं से खौफजदा हैं। लोगों का कहना है कि प्रभावित स्थान पर घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने जरूरी हैं।