फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Uttarakhand News: Kashmir Saffron Farming in Harsil valley Soon

उत्तराखंड: कश्मीर के केसर से महकेगी हर्षिल घाटी, पांच गांवों को खेती के लिए किया चिह्नित

Tue, 29 Jun 2021 01:40 PM IST
अलका त्यागी अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 29 Jun 2021 01:40 PM IST
सार

विभाग इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जम्मू और कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि का सहयोग ले रहा है।  

विज्ञापन
Uttarakhand News: Kashmir Saffron Farming in Harsil valley Soon
केसर - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

सेब और राजमा के बाद उत्तराखंड की हर्षिल घाटी में कश्मीर के केसर की खुशबू भी बिखरेगी। उद्यान विभाग ने जिला योजना से घाटी के पांच गांवों में केसर की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। पिछले साल हर्षिल घाटी में कुछ काश्तकारों को ट्रायल के लिए केसर के बीज दिए गए थे, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

विज्ञापन


इसी से उत्साहित होकर उद्यान विभाग ने घाटी के सुक्की, झाला, मुखबा, पुराली व जसपुर गांवों में केसर की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। जहां कुल 38 काश्तकारों को योजना का लाभ दिया जाएगा और लगभग 35 से 37 नाली भूमि पर केसर की खेती होगी। विभाग इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जम्मू और कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि का सहयोग ले रहा है।  
विज्ञापन


सबसे महंगी बिकती है केसर
औषधीय गुणों से भरपूर केसर या जाफरान को पूरी दुनिया का सबसे महंगा मसाला माना जाता है। देश में ही केसर की प्रति ग्राम कीमत 100 से 400 रुपये के बीच है। ऐसे में हर्षिल घाटी के काश्तकार केसर की खेती की तरफ उन्मुख होते हैं, तो इससे निश्चित ही उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही कई बार मौसम के प्रतिकूल होने के चलते सेब की फसल बर्बाद होने की स्थिति में केसर की खेती लाभकारी साबित होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

हर्षिल घाटी में केसर के लिए मौसम मुफीद

हर्षिल घाटी के केसर की खेती के लिए मौसम एकदम अनुकूल है। सीएचओ डा. रजनीश सिंह का कहना है कि केसर की खेती के लिए मुख्य आवश्यकता ठंडे वातावरण की है। हर्षिल घाटी में अच्छी बर्फबारी होती है।

नदी द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी (जलोढ़ मृदा) में केसर का अच्छा उत्पादन होता है। हिमालयी क्षेत्र होने के चलते हर्षिल घाटी में भी ऐसी ही मिट्टी है। बताया कि सितंबर-अक्तूबर में बीज लगाने के बाद मई-जून में उत्पादन मिलेगा।  

योजना के लिए जिला योजना 2021-22 में 9.8 लाख का बजट रखा गया है। काश्तकारों को केसर के बीज उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। जरूरत हुई तो बागवानी और वानिकी विवि भरसार व कृषि विवि पंतनगर का भी सहयोग लेंगे।
- डा. रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी, उत्तरकाशी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed