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उत्तराखंड: परिवहन विभाग की लापरवाही से लग गया करोड़ों का चूना, अब आंकड़े दुरुस्त करने में जुटे अधिकारी

Mon, 06 Sep 2021 02:08 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 06 Sep 2021 02:08 AM IST
सार

मामला है उत्तराखंड में यूपी व अन्य राज्यों से आने वालीं बसों का। राज्यों के बीच जितनी बसें तय हुई हैं, उससे कई गुना अधिक बसें आ रही हैं। हैरत की बात यह है कि जब दो दिन पहले आईएसबीटी पहुंचे सचिव परिवहन डॉ.रंजीत सिन्हा ने अधिकारियों से पूछा कि यूपी की कितनी बसें उत्तराखंड आ रही हैं तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए।

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Uttarakhand News: High Revenue Loss due to negligence of Transport Department
राजस्व का नुकसान - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

उत्तराखंड परिवहन विभाग की एक लापरवाही से करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो गया। अब सचिव परिवहन ने सख्ती की तो विभाग के अधिकारियों को नियमों की याद आई। अब आनन-फानन में विभागीय अधिकारी पूरी आंकड़े दुरुस्त करने में जुट गए हैं।

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दरअसल, यह मामला है उत्तराखंड में यूपी व अन्य राज्यों से आने वालीं बसों का। राज्यों के बीच जितनी बसें तय हुई हैं, उससे कई गुना अधिक बसें आ रही हैं। हैरत की बात यह है कि जब दो दिन पहले आईएसबीटी पहुंचे सचिव परिवहन डॉ.रंजीत सिन्हा ने अधिकारियों से पूछा कि यूपी की कितनी बसें उत्तराखंड आ रही हैं तो वह कोई जवाब नहीं दे पाए। इससे सचिव बेहद नाराज हुए।
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उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। न केवल यूपी बल्कि पंजाब व अन्य राज्यों से भी निर्धारित से अधिक बसें उत्तराखंड पहुंच रही हैं। हाल ही में परिवहन विभाग ने पंजाब को नोटिस भी जारी किया था। सचिव की नाराजगी के बाद से परिवहन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप है।
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वह दिनरात एक करके यूपी व अन्य राज्यों से आने वाली बसों के आंकड़े जुटाने में लगे हुए हैं। बसों की सही गणना न होने की वजह से उन राज्यों से टैक्स भी नहीं आ पाया। केवल उन्हीं बसों का टैक्स आ रहा है, जिनका संचालन निर्धारित है।

उत्तराखंड हर साल देता है 30 करोड़
उत्तराखंड की रोडवेज बसें यूपी व अन्य राज्यों में संचालित होती हैं। इसके एवज में परिवहन निगम हर साल करीब 30 करोड़ रुपये टैक्स का भुगतान करता आ रहा है। इसमें करीब 24 करोड़ रुपये का टैक्स यूपी को जाता है जबकि करीब छह करोड़ रुपये का टैक्स अन्य राज्यों को जाता है।

परिवहन निगम को सभी भुगतान के लिए 200 करोड़ देने की मांग

उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि परिवहन निगम में कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्ति के भुगतान आदि के लिए कम से कम 200 करोड़ रुपये की राहत दी जाए। इस संबंध में संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है। संघ के महामंत्री बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि निगम की ओर से एसीपी को लेकर जारी आदेश की वजह से कर्मचारियों का वित्तीय शोषण हो रहा है। उन्होंने मांग की कि जल्द से जल्द इस आदेश को स्थगित किया जाए। 

संघ ने मांग की कि मृतक आश्रित पर नियमित नियुक्ति की जाए। लांबा कमेटी के सुझावों को सार्वजनिक कर परिवहन निगम को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए परिवहन विभाग के अधीन संचालित किया जाए। गलत वेतन निर्धारण का दोबारा निरीक्षण का आदेश जारी किया जाए। निगम में कार्यरत संविदा, आउटसोर्सिंग चालक, परिचालकों एवं कार्यशालाओं में दैनिक मजदूरी पर रखे गए कार्मिकों को नियमित किया जाए।

नियमितीकरण तक उनको केंद्र सरकार की ओर से तय कम से कम 24000 रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाए। वर्तमान में ग्रामीण पर्वतीय क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों की बेराजगारी को देखते हुए उनको उनके ही क्षेत्र में रोजगार मुहैया कराने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों के महत्वपूर्ण स्थानों पर परिवहन निगम के डिपो खोले जाएं। परिवहन निगम के लिए हर साल करी 100 नई बसों की खरीद को बजट की व्यवस्था की जाए। ज्ञापन में संघ ने इसके अलावा भी कई मांगें की।

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