उत्तराखंड: जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान ने तैयार की खास चाय, थकान और तनाव को दूर करने में होगी मददगार
उत्तराखंड में जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान(एचआरडीआई) ने समय और मूड के हिसाब से हर्बल चाय तैयार की है।
विस्तार
जड़ी बूटी शोध एवं विकास संस्थान(एचआरडीआई) ने हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली सैकड़ों जड़ी बूटी में चुनिंदा हर्बल से एक खास चाय बनाई है। मार्निंग टी की चुस्की शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही अच्छी सुगंध और स्वाद मन को प्रसन्न करती है। जबकि नाइट हर्बल पीने से अच्छी नींद आएगी। जबकि इवनिंग हर्बल चाय से ऑफिस या अधिक काम की थकान और तनाव को दूर कर सकते हैं।
एचआरडीआई के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार की गई छह तरह की हर्बल चाय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसमें एंटी ऑक्सीटेंट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन की मात्रा होने से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, वजन कम करने, तनाव, अच्छी नींद के लिए लाभकारी है।
उत्तराखंड को चाय उत्पादन में एक ब्रांड के रूप में विकसित करने के लिए सरकार ने मार्केटिंग पर जोर है। संस्थान की ओर से हर्बल टी तैयार करने की तकनीक को उद्योग को हस्तांतरित की जा रही है। अभी तक मसूरी स्थित कंपनी ने संस्थान से इस तकनीक को लेकर हर्बल टी का उत्पादन किया है। हर्बल टी के इस्तेमाल करने से जहां लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा, वहीं, व्यावसायिक उत्पादन से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
खाने का हर्बल नमक भी तैयार कर रहा संस्थान
एचआरडीआई की ओर से जड़ी बूटी और चट्टानी नमक से तीन तरह के हर्बल नमक, इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए पंच प्राश भी तैयार किया जा रहा है। इसका प्रयोगशाला परीक्षण चल रहा है। टेस्टिंग के बाद जल्द ही हर्बल नमक व पंच प्राश को बाजार में उतारा जाएगा।
ये हैं हर्बल चाय
एचआरडीआई ने मार्निंग, इवनिंग, नाइट हर्बल टी, क्वीन, किंग, एंटीएजिंग सीबकथ्रोन हर्बल टी तैयार की है। नाइट हर्बल टी में वसा व कैलोरी की मात्रा कम होती है। जिससे नींद अच्छी आती है। सुबह की चाय प्राकृतिक जड़ी बूटी, स्वीटनर और सुगंध से ताजगी व ऊर्जा देती है। क्वीन हर्बल टी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होने से वजन कम करती है। किंग हर्बल टी में एंटी ऑक्सीडेंट होने से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। इवनिंग हर्बल टी से तनाव व थकान दूर होती है।
एचआरडीआई के वैज्ञानिकों ने हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्राकृतिक जड़ी बूटी से छह तरह की चाय तैयार की है। इन चाय का व्यावसायिक उत्पादन कर ब्रांडिंग व मार्केटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे जहां लोगों को हर्बल चाय के इस्तेमाल से स्वास्थ्य लाभ मिलने के साथ रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री
संस्थान ने हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली जड़ी बूटी पर शोध करने के बाद छह तरह की हर्बल चाय तैयार की है। संस्थान की ओर से हर्बल चाय तैयार करने की तकनीक को स्थानांतरित की जा रही है। यदि कोई उद्योग हर्बल चाय का उत्पादन करना चाहता है तो वे संस्थान से तकनीक ले सकते हैं। संस्थान की ओर से चाय तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा
-चंद्रशेखर सनवाल, निदेशक एचआरडीआई