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उत्तरकाशी आपदाः आराकोट में फिर शुरू हुआ हेली रेस्क्यू, दो गर्भवती महिलाओं को पहुंचाया देहरादून

Fri, 23 Aug 2019 11:28 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 23 Aug 2019 11:28 AM IST
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Uttarakhand News: heli rescue again starts in uttarkashi arakot
- फोटो : अमर उजाला

आपदाग्रस्त आराकोट (उत्तरकाशी) क्षेत्र से दो गर्भवती महिलाओं को शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से देहरादून लाया गया। दोनों महिलाओं को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल लाया गया। इनमें से एक को भर्ती किया गया है। जबकि दूसरी महिला की स्थिति सामान्य होने पर जांच के बाद परिजन दून स्थित रिश्तेदार के घर ले गए।

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आराकोट की मोंडा निवासी प्रतिमा (पत्नी मनोज) और रेखा (पत्नी ओमप्रकाश) को आपदाग्रस्त क्षेत्र से हेलीकॉप्टर से देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हैलीपैड लाया गया। वहां से एंबुलेंस से दोनों को महिला अस्पताल पहुंचाया गया।

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यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने प्रतिमा को भर्ती कर दिया। जबकि रेखा की जरूरी जांचों के बाद स्थिति सामान्य पाई गई। उसके बाद उसे परिजन रिश्तेदार के घर चली गई। प्रतिमा सात माह और रेखा आठ माह की गर्भवती है। परिजनों ने बताया रात को दोनों महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। दर्द उठने पर स्थानीय अस्पताल ले जाने की तैयारी की गई, लेकिन वहां पर्याप्त सुविधाएं न होने पर प्रशासन को इससे अवगत कराया। स्थानीय प्रशासन ने देहरादून स्थित उच्चाधिकारियों से वार्ता की। आनन-फानन में दोनों महिलाओं को हेलीकॉप्टर से देहरादून पहुंचाने का निर्णय लिया गया।

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सुबह दोनों महिलाओं को महिला दून अस्पताल पहुंचाया गया। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अब दोनों महिलाओं की स्थिति सामान्य है। गर्भवती प्रतिमा ने बताया बादल फटने से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। उधर, पिछले दिनों गांधी शताब्दी अस्पताल लाई गई आराकोट निवासी गर्भवती महिला ललिता की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें परिजन अब अस्पताल से ले गए हैं।

एसडीआरएफ की नई कंपनी का प्रस्ताव शासन को भेजा

आपदा के मद्देनजर प्रदेश में हर वर्ष एसडीआरएफ की एक कंपनी तैयार करने की योजना थी। इसका प्रस्ताव शासन में भी लंबित है, लेकिन दो साल में एसडीआरएफ की कंपनी में इजाफा ही नहीं हुआ है। फिलहाल प्रदेश में एसडीआरएफ की चार कंपनियां है। इनमें से दो गढ़वाल और दो कुमाऊं में सक्रिय हैं। हाल ही दिनों में आराकोट में बादल फटने के बाद राहत कार्यों में एसडीआरएफ की भूमिका सराहनीय रही। ऐसे में शासन ने नए सिरे से एसडीआरएफ की कंपनी का प्रस्ताव मांगा है।

पुलिस मुख्यालय ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीआरएफ की नई कंपनी का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। एसडीआरएफ के आईजी संजय गुंज्याल का कहना है पुलिस मुख्यालय के अधिकारी शासन के संपर्क में है। उधर आराकोट में चौकी खोलने का भी प्रस्ताव है। उत्तरकाशी के प्रभावित इलाकों का भ्रमण से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने चौकी स्थापित करने की घोषणा की थी। पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार का कहना है फिलहाल अस्थाई रुप से आराकोट में चौकी खोली जा रही है। 

अब बुनियादी सुविधाओं की बहाली में जुटा प्रशासन

आराकोट क्षेत्र में आई भीषण आपदा के बाद चार दिनों तक राहत एवं बचाव अभियान चलाने के बाद अब प्रशासन ने अपना पूरा ध्यान बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने पर केंद्रित कर दिया है। इसके तहत सभी अधिकारी सड़क, विद्युत, पेयजल आदि की व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द सुचारु करने में जुट गए हैं।

इसके अतिरिक्त यातायात सुविधा सुचारु होने तक सभी प्रभावित क्षेत्रों में पैदल मार्गों से रसद आदि जीवन रक्षक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। विगत 18 अगस्त को आई भीषण आपदा के बाद से ही मौके पर डटे डीएम डॉ.आशीष चौहान ने बृहस्पतिवार को बुनियादी सुविधाओं की बहाली के लिए किए जा रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मोटर मार्गों और पैदल रास्तों को प्राथमिकता के साथ जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही बिजली, पेयजल व दूरसंचार सुविधाओं को भी जल्द बहाल करने को कहा। इस दौरान संबंधित अधिकारियों ने बताया कि आराकोट-सनेल-रोहड़ू हाईवे पर यातायात सुचारु कर दिया गया है, जबकि आपदा प्रभावित क्षेत्र में टिकोची-किराणू, आराकोट-चिवां-बाल्चा, चिवां-मोंडा, बरनाली-माकुड़ी, बरनाली-झोटाड़ी आदि मोटर मार्गों पर यातायात बहाली के प्रयास चल रहे हैं।

विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के आपदा प्रभावित 34 गांवों में से 19 गांवों की बिजली आपूर्ति सुचारु की जा चुकी है। आराकोट क्षेत्र के 15 गांवों में भी 31 अगस्त तक विद्युत आपूर्ति बहाल कर ली जाएगी। प्रशासन के अनुसार माकुड़ी, कलीच, झोटाड़ी, गोकुल, थुनारा, मैंजणी, किरोली व दुचाणु में पेयजल व्यवस्था सुचारु कर ली गई है, जबकि टिकोची, डगोली, जागटा, चिवां, मोल्डा, बलावट, बरनाली, कोलिया तथा भुटाणू में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

डीएम ने कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों को आपदा में क्षतिग्रस्त कृषि भूमि व फसलों का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रभावित गांवों में हालात सामान्य होने तक नियमित रूप से फूड पैकेट, पानी की बोतल, दवा आदि जीवन रक्षक सामग्री पहुंचाते रहने को कहा।

इस दौरान  एसपी पंकज भट्ट, सीडीओ प्रशांत आर्य, एसडीएम अनुराग आर्य, परियोजना अधिकारी राजेंद्र रावत, पूर्ति अधिकारी गोपाल मटूड़ा, मुख्य कृषि अधिकारी महिधर तोमर, पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री, एआरटीओ चक्रपाणि मिश्र सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

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