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उत्तराखंड : शासन-प्रशासन ने लॉकडाउन से स्कूल को बनाया जेल, छात्रों के साथ हो रहा खेल

Thu, 05 Nov 2020 04:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पौड़ी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 05 Nov 2020 04:00 PM IST
सार

  • जीआईसी ओजली का मामला, अध्यापन कार्य हो रहा है प्रभावित
  • शासन-प्रशासन ने लॉकडाउन से बनाया है अस्थायी जेल

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Uttarakhand news: Governance and administration made school jailed due to lockdown
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विद्यालय को शासन-प्रशासन द्वारा अस्थायी जेल बनाए जाने से छात्र-छात्राएं खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। विद्यालय में कैदी होने से अभिभावक सहमे हुए हैं। छात्र स्कूल तो आ रहे हैं, लेकिन शौचालय एक होने से उसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

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विद्यालय की एसएमसी और पीटीए ने अस्थायी जेल विद्यालय से हटाए जाने की मांग की है। प्रधानाचार्य का कहना है कि जिला प्रशासन को दो पत्र भेजे गए, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। वहीं एडीएम पौड़ी ने कहा कि विद्यालय को जल्द ही अस्थायी जेल से मुक्त कर लिया जाएगा। 
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जिला कारागार खांड्यूसैंण के समीप स्थित राजकीय इंटर कॉलेज ओजली को शासन-प्रशासन ने कोरोना महामारी को देखते हुए अगस्त 2020 में अस्थायी जेल बनाया था, लेकिन विद्यालय खुलने से पहले अस्थायी जेल को शिफ्ट नहीं किया गया। इसका खामियाजा जीआईसी ओजली के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। विद्यालय खुले चार दिन हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन विद्यालय से अस्थायी जेल हटाने में अभी तक नाकाम है।
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विद्यालय के चार कक्षों को अस्थायी जेल के रूप में तैयार किया गया है। यहां कक्षा 10वीं में 35 और 12वीं में 34 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जबकि बुधवार को विद्यालय में 38 विद्यार्थी पढ़ने के लिए आए। मंगलवार को 17 और पहले दिन 20 बच्चे विद्यालय पहुंचे थे। विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की अध्यक्ष मीना देवी व पीटीए अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने विद्यालय से जल्द अस्थायी जेल हटाए जाने की मांग की है।

बिना मास्क के मिले सुरक्षाकर्मी

मीना देवी व पीटीए अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने कहा कि विद्यालय परिसर में जेल के माहौल को देखते हुए अभिभावक सहमे हुए हैं, जबकि बच्चों में भी डर बना हुआ है। प्रधानाचार्य मंगल सिंह चौहान ने कहा कि जिला प्रशासन को दो पत्र भेज विद्यालय को अस्थायी जेल बनाए जाने से आ रही परेशानियों को लेकर अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है।

जेलर जिला कारागार खांड्यूसैंण डीपी सिन्हा ने बताया कि कोरोना महामारी को देखते हुए विद्यालय को अस्थायी जेल बनाया गया था। अपराधी को 14 दिन अस्थायी जेल में रखने के बाद जिला कारागार में शिफ्ट किया जाता है। कहा कि यहां वर्तमान में तीन कैदी रह रहे हैं।

वहीं एडीएम पौड़ी डॉ. एसके बरनवाल ने बताया कि विद्यालय को अस्थायी जेल से मुक्त किए जाने के लिए एसडीएम सदर और शिक्षा विभाग को निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय को जल्द ही अस्थायी जेल से मुक्त कर लिया जाएगा। 

अस्थायी जेल जीआईसी ओजली में सुरक्षाकर्मी बिना मास्क के ही मिले। मीडिया के पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने मास्क का उपयोग किया। जेल अधीक्षक सिन्हा ने कहा कि मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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