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उत्तराखंडः ग्लेशियर की झीलों की होगी कड़ी निगरानी, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वैज्ञानिक संस्थानों को लिखा पत्र
Mon, 22 Mar 2021 10:54 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 22 Mar 2021 10:54 AM IST
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एनडीएमए ने दिया गाइडलाइन का कड़ाई से पालन का निर्देश
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हिमालयी राज्यों में ग्लेशियर की झीलों के फटने और उससे होने वाली तबाही को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए ) ने गाइडलाइन का कड़ाई से पालन का निर्देश दिया है। एनडीएमए के संयुक्त सचिव रमेश कुमार ने इस संबंध में तमाम वैज्ञानिक संस्थानों, विभागों और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर जो गाइडलाइन जारी की गई थी उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। संयुक्त सचिव रमेश कुमार का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की वजह से ग्लेशियर झीलों के निर्माण में तेजी आई है।
पूर्व में बनी झीलों में और अधिक फैलाव हो रहा है, जो आपदाओं के लिहाज से खतरनाक है। ग्लेशियर से बनी झीलें अस्थिर होती हैं और इनके फटने से घाटियों के निचले इलाकों में भारी तबाही भी होती है। 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में चौराबाड़ी झील के फटने की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है।
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बता दें कि गाइडलाइन के मुताबिक वाडिया इंस्टीट्यूट को अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए ऐसी झीलों की निगरानी करनी है। वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. कालाचॉद सांई का कहना है कि गाइडलाइन के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
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पत्र में कहा गया है कि अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस पर जो गाइडलाइन जारी की गई थी उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। संयुक्त सचिव रमेश कुमार का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की वजह से ग्लेशियर झीलों के निर्माण में तेजी आई है।
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पूर्व में बनी झीलों में और अधिक फैलाव हो रहा है, जो आपदाओं के लिहाज से खतरनाक है। ग्लेशियर से बनी झीलें अस्थिर होती हैं और इनके फटने से घाटियों के निचले इलाकों में भारी तबाही भी होती है। 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में चौराबाड़ी झील के फटने की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है।
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बता दें कि गाइडलाइन के मुताबिक वाडिया इंस्टीट्यूट को अंतरिक्ष आधारित तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए ऐसी झीलों की निगरानी करनी है। वाडिया इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. कालाचॉद सांई का कहना है कि गाइडलाइन के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।