उत्तराखंड: कोविड से अनाथ बच्चों को दी जाएगी निशुल्क उच्च शिक्षा, टैबलेट और यूनिफार्म भी मिलेगी
आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोविड में अनाथ बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। उनके लिए घर के पास के राजकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश की निश्चित व्यवस्था होगी।
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उत्तराखंड में कोविड से अनाथ बच्चों को नजदीक के महाविद्यालय में निशुल्क उच्च शिक्षा मिलेगी। घर से महाविद्यालय तक सरकारी परिवहन के किराये में छूट, हर साल विशेष सहायता अनुदान राशि, छात्रावास में निशुल्क रहना और खाना, टैबलेट और महाविद्यालय यूनिफार्म भी मिलेेगी। उच्च शिक्षा सचिव दीपेंद्र चौधरी की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोविड में अनाथ बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। उनके लिए घर के पास के राजकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश की निश्चित व्यवस्था होगी। इन बच्चों से मात्र कोषागार प्रवेश शुल्क, जो अधिकतम तीन से पांच रुपये होता है, लिया जाएगा।
हर साल निशुल्क मिलेगी यूनिफार्म
महाविद्यालय ऐसे प्रत्येक छात्र-छात्रा को हर साल निशुल्क एक सेट यूनिफार्म देगा। स्नातक व परास्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए प्रभावित बच्चों को एनसीसी, एनएसएस एवं खेल प्रमाण पत्रों की तरह वरीयता दी जाएगी। उनके प्रवेश के लिए महाविद्यालयों में सीट सुरक्षित रखी जाएगी। प्रत्येक विषय में महाविद्यालय पुस्तकालय से दो पुस्तकें हर सत्र में दी जाएंगी।
परिवहन किराये में मिलेगी पूरी छूट
ऐसे अनाथ बच्चों को सरकारी परिवहन के किराये में पूर्ण छूट दी जाएगी, इसके लिए महाविद्यालय द्वारा परिवहन विभाग से संपर्क कर पास की व्यवस्था की जाएगी।
हर साल आवेदन के आधार पर अनुदान
उच्च शिक्षा सचिव की ओर से समस्त राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं उच्च शिक्षा निदेशक को जारी आदेश में कहा गया है कि ऐसे बच्चों को हर साल अनुदान राशि आवेदन के आधार पर दी जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से बजट की व्यवस्था की जाएगी।
वात्सल्य योजना शुरू होने के बाद भी बच्चों को नहीं मिल पा रहा पूरा लाभ
प्रदेश के मुख्यमंत्री के बच्चों के मामा और मंत्री के बुआ बन जाने के बाद भी कोविड में अनाथ हुए 1706 बच्चों के स्वास्थ्य, संपत्ति की देखभाल आदि के संबंध में विभाग शासनादेश जारी नहीं कर रहे हैं। इससे इन बच्चों को योजना शुरू होने के बाद भी उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने मामले में नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। कहा है कि बेसहारा बच्चों को अधिक से अधिक विभागों का सहयोग मिले, इसके लिए इन विभागों से शीघ्र शासनादेश जारी करवाया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीती एक अगस्त को मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना का शुभारंभ किया था। इसी दौरान उन्होंने खुद को बच्चों का मामा और मंत्री आर्य ने खुद को बुआ बताया था। योजना के श्रीगणेश के बाद से इन बच्चों के खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सरकार की ओर से हर महीने तीन हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, लेकिन बच्चों को मुफ्त खाद्यान, स्वास्थ्य चिकित्सा आदि योजनाओं के संबंध में शासनादेेश न होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने इस पर नाराजगी जताई है। मंत्री ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि कैबिनेट की बैठक में इस संबंध में सभी विभागों को निर्णय भेज दिए गए थे, लेकिन विभागों की ओर से अब तक कोई शासनादेश जारी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बच्चों के साथ खिलवाड़ है। वहीं मंत्री ने कहा कि पूर्व में हुई बैठक में यह सहमति बनी थी कि इससे संबंधित समस्त कार्यवाही सात दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी, लेकिन अब तक इस मसले पर कार्यवाही नहीं हुई।
मुख्य सचिव एवं विभागीय अधिकारियों की 9 अगस्त को हुई बैठक में कहा गया था कि योजना से संबंधित सभी विभागों के शासनादेश जारी किए जाएं, लेकिन अब तक जीओ नहीं हुआ। मैं कोविड से अनाथ हुए बच्चों की बुआ हूं, मेरा कर्तव्य बनता है कि अधिकारियों को इस संबंध में बार-बार आगाह किया जाए, ताकि बच्चों को योजना का पूरा लाभ मिल सके।
-रेखा आर्य, महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री