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उत्तराखंड के चार लाख वाहन ग्रीन टैक्स के दायरे में, परिवहन मंत्रालय ने भेजा प्रस्ताव
Wed, 31 Mar 2021 10:17 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 31 Mar 2021 10:17 AM IST
सार
- परिवहन मंत्रालय ने भेजा ग्रीन टैक्स का प्रस्ताव, राज्य को लेना है फैसला
- 15 साल से पुराने वाहनों पर अगले साल से ग्रीन टैक्स लगाने की है तैयारी
- उत्तराखंड में पंजीकृत पड़ोसी राज्यों के वाहन भी आएंगे दायरे में
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पुराने वाहन ग्रीन टैक्स के दायरे में
- फोटो : iStock
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विस्तार
उत्तराखंड के चार लाख से अधिक पुराने वाहन ग्रीन टैक्स के दायरे में आ रहे हैं। परिवहन मंत्रालय ने देशभर के ऐसे वाहनों का डाटा जारी किया है, जिसमें उत्तराखंड के भी करीब चार लाख वाहन शामिल हैं।
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मंत्रालय ने राज्य को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अभी सरकार को फैसला लेना है। इस दायरे में न केवल उत्तराखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों के वह वाहन भी आएंगे, जिनका पंजीकरण उत्तराखंड में हुआ था।
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इनमें दो करोड़ वाहन ऐसे हैं जो 20 साल से भी पुराने हैं
देश में चार करोड़ से ज्यादा वाहन ऐसे हैं जो कि 15 साल या इससे अधिक पुराने हैं। इनमें दो करोड़ वाहन ऐसे हैं जो 20 साल से भी पुराने हैं। 70 लाख पुराने वाहनों के साथ कर्नाटक पहले, 56 लाख से अधिक वाहनों के साथ यूपी दूसरे और 49 लाख से अधिक वाहनों के साथ दिल्ली इस फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर है।
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महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में पुराने वाहनों की संख्या 17.58 लाख से 12.29 लाख के बीच है। देश में 11 राज्य या केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जिनमें 15 साल से पुराने वाहनों की संख्या साढ़े पांच लाख से कम हैं। इसमें झारखंड, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पुड्डुचेरी, असम, बिहार, गोवा, त्रिपुरा, दादरा-नागर हवेली और दमन-दीव शामिल हैं।
उत्तराखंड में ऐसे वाहनों की संख्या चार लाख से ऊपर है। अभी यह प्रस्ताव है कि आठ साल से ज्यादा पुराने वाहनों से फिटनेस सर्टिफिकेट के नवीनीकरण के समय रोड टैक्स का 10 से 25 प्रतिशत ग्रीन टैक्स वसूला जाएगा। इसी प्रकार, प्राइवेट वाहनों से 15 साल बाद रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के समय ग्रीन टैक्स वसूलने की योजना है। परिवहन विभाग उत्तराखंड के मुताबिक, अभी यह कवायद शुरू हुई है, राज्य सरकार के निर्देशों के तहत वाहनों पर फैसला लिया जाएगा।
सीएनजी, एलपीजी वाहनों को रहेगी छूट
सरकार की योजना पुराने वाहनों पर जल्द से जल्द ग्रीन टैक्स लगाने की है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके और प्रदूषण में कमी लाई जा सके। हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सीएनजी, एथेनॉल व एलपीजी जैसे वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों को ग्रीन टैक्स के दायरे से बाहर रखा गया है।
मंत्रालय के मुताबिक, ग्रीन टैक्स से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए किया जाएगा। कृषि में इस्तेमाल होने वाले वाहन जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और टिलर को ग्रीन टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा। सार्वजनिक परिवहन जैसे सिटी बसों से कम ग्रीन टैक्स वसूला जाएगा। ग्रीन टैक्स का निर्धारण पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रकार के आधार पर किया जाएगा।
कम टैक्स के लालच में उत्तराखंड से पंजीकृत वाहन भी आएंगे दायरे में
दरअसल, उत्तराखंड में दो साल पहले तक अन्य राज्यों के मुकाबले वाहन पंजीकरण पर कम टैक्स लगता था। इस वजह से यूपी और अन्य पड़ोसी राज्यों के तमाम वाहन उत्तराखंड में पंजीकृत हुए। इनमें भी जो वाहन 15 साल से पुराने होंगे, वह ग्रीन टैक्स के दायरे में आएंगे। हालांकि, टैक्स की दर दो साल पहले सरकार ने आठ प्रतिशत से बढ़ाकर दस प्रतिशत कर दी।