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उत्तराखंड: वन विभाग का होगा पुनर्गठन, बदलेंगी प्रभागों की सीमाएं, प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंपेगी कमेटी

Mon, 19 Jul 2021 03:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 19 Jul 2021 03:37 PM IST
सार

प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि पिछले सप्ताह वन अधिकारियों के सम्मेलन ने इस मुद्दे पर गहन मंथन किया गया।

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uttarakhand news: forest department will be reorganized, boundaries of the divisions will change
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वन विभाग के पुनर्गठन की कवायद मुख्यालय स्तर पर शुरू हो गई है। इसके लिए विभागीय स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है, जो रेंज कार्यालय से लेकर सभी डिवीजन स्तर पर सुझाव लेने के बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को सौंपेगी। 31 जुलाई तक प्रस्ताव तैयार कर शासन को सौंप दिया जाएगा। 

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प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि पिछले सप्ताह वन अधिकारियों के सम्मेलन ने इस मुद्दे पर गहन मंथन किया गया। विभाग के पुनर्गठन के लिए सभी रेंज से लेकर प्रभाग स्तर पर एक सप्ताह के भीतर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। इसके लिए विभागीय स्तर पर तीन वरिष्ठ वन अधिकारियों की एक कमेटी गठित की गई है, जो इन सभी सुझावों पर विचार करने के बाद प्रस्ताव तैयार करेगी।
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इसके बाद इस प्रस्ताव को शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। जहां से कैबिनेट में जाएगा। उन्होंने बताया कि वन विभाग का पुनर्गठन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए तैयार किया जा रहा है। इसमें वन्यजीव मानव संघर्ष, वनाग्नि, आपदा प्रबंधन, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट को ध्यान में रखा जाएगा।
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पीसीसीएफ भरतरी ने बताया कि विभाग के पुनर्गठन के बाद मैन पावर का बेहतर ढंग से इस्तेमाल किया जा सकेगा। वर्तमान में एक प्रभाग ऐसे हैं, जो कालांतर में विभिन्न परियोजनाओं के मद्देनजर गठित किए गए हैं, लेकिन अब उनके पास कोई काम नहीं है। जैसे टिहरी बांध निर्माण के दौरान टिहरी डैम प्रभाग-वन और टू गठित किए गए थे, जिनका काम बांध के चारों तरफ ग्रीन बेल्ट को विकसित करना था।

अब जब बांध का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन दोनों प्रभाग अब भी अस्तित्व में हैं। जबकि अब इन प्रभागों के पास कोई काम नहीं है। ऐसे प्रभागों को समाप्त किया जाएगा। इसके अलावा वन सीमा परिक्षेत्र में भी बदलाव किया जाएगा। इसके तहत राजाजी टाइगर रिजर्व और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की सीमाओं में भी फेरबदल संभव है। कुछ प्रभाग ऐसे हैं, जो एक ही सीमा के अंतर्गत आते हैं, लेकिन उनके प्रभागीय अधिकारी अलग-अलग हैं, ऐसे प्रभाग को एक किया जाएगा।

उत्तराखंड गठन के बाद पहली बार होगा विभाग का पुनर्गठन 
प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड (हौफ) राजीव भरतरी ने बताया कि राज्य गठन के बाद पहली बार विभाग का पुनर्गठन किया जाएगा। इससे पूर्व यूपी के जमाने में विभाग का पुनर्गठन किया गया था। हालांकि राज्य बनने के बाद कुछ प्रभागों के गठन का काम किया गया, लेकिन ये सभी प्रभाग परियोजना विशेष के लिए गठित किए थे। 


मैन पावर का हो सकेगा सही इस्तेमाल
वन विभाग में लंबे समय से भर्तियां नहीं हो पाई हैं। ऐसे में मैन पावर की कमी हमेशा काम में रोड़ा बनती है। विभागीय पुनर्गठन से काफी हद तक इस कमी को पूरा किया जा सकेगा। जहां जरूरत होगी, वहां खत्म किए गए प्रभागों के अधिकारियों कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।

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