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उत्तराखंड: मुख्यमंत्री ने किया कार्यशाला का शुभारंभ, कहा- संस्कार ही बच्चों को नशे से बचा सकते हैं
Tue, 16 Mar 2021 09:34 PM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 16 Mar 2021 09:34 PM IST
सार
- मुख्यमंत्री ने किया बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, रोकथाम और पुनर्वास विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ
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सीएम तीरथ सिंह रावत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संस्कार ही बच्चों को नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से बचा सकते हैं। यह कहना है मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का। उन्होंने यह बात यहां हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से बच्चों में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, रोकथाम और पुनर्वास विषय पर आयोजित कार्यशाला में कही।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी में नशे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। बच्चों को नशा सहित तमाम विकृतियों से बचाने के लिए उन्हें संस्कारवान बनाना होगा। संस्कारित बच्चे जीवन के किसी भी क्षेत्र में असफल नहीं होते। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति को लेकर जमीनी स्तर पर जागरुकता अभियान चलाए जाने चाहिए। बच्चे स्कूल से अधिक समय अपने घर पर बिताते हैं। लिहाजा बच्चों को संस्कारवान बनाने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्हें बच्चों की गतिविधियों पर बराबर नजर बनाने की जरूरत है, ताकि उन्हें गलत दिशा में जाने से रोका जा सके।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पाश्चात्य देश भारतीय संस्कृति की महानता को समझ चुके हैं। इसलिए वे हमारी संस्कृति का अनुसरण कर रहे हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि हमारे देश के युवा पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान में सिर्फ सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हो सकते। इसके लिए सामाजिक संगठनों, संस्थाओं और समाज के गणमान्य लोगों को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाने की भी आवश्यकता है।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि नशा मुक्ति के लिए इच्छा शक्ति जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में आ चुका है तो दृढ़ इच्छा शक्ति के बूते ही वह नशे को छोड़ सकता है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि आयोग ने प्रदेश में वर्ष 2018 से नशे के खिलाफ अभियान शुरू किया था जो निरंतर जारी है। कार्यक्रम में आयोग की सचिव झरना कमठान, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ सहित कई प्रदेशों के बाल आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य मौजूद रहे।
वन पंचायतों में महिलाओं को दी प्राथमिकता
वन पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं वनों से जुड़ी हैं। गौरा देवी ने चिपको आंदोलन चलाया। यही वजह है कि सरकार ने वन पंचायतों में महिलाओं को प्राथमिकता दी हैं। इन महिलाओं को दस हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा।
चुनाव में सीएम के चेहरे पर बोले यह कांग्रेस का मामला
यह पूछे जाने पर कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से यह कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस मसले पर कुछ नहीं कहना यह कांग्रेस का मामला है।