उत्तराखंड: पर्यावरणीय चिंता और राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल के बीच झूल रही चारधाम ऑलवेदर रोड
सरहद पर चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए सेना से सेवानिवृत्त हो चुके सैन्य अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ऑल वेदर रोड के निर्माण की जोरदार वकालत कर रहे हैं।
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पर्यावरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच महत्वाकांक्षी चारधाम ऑलवेदर रोड पर बेशक कश्मकश की स्थिति बनी है, लेकिन अब परियोजना का 19 फीसदी हिस्सा ही बचा है, जिस पर पर्यावरणीय व अन्य कारणों से केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिल सकी है। 81 फीसदी पर काम जारी है। हालांकि परियोजना के औचित्य को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों की राय एक-दूसरे से एकदम जुदा है।
ऑल वेदर रोड के निर्माण की जोरदार वकालत
सरहद पर चीन की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए सेना से सेवानिवृत्त हो चुके सैन्य अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ऑल वेदर रोड के निर्माण की जोरदार वकालत कर रहे हैं। इसके विपरीत पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि परियोजना के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए नाजुक हिमालय की पहाड़ियों और हजारों पेड़ों को काटे जाने से पर्यावरण को भारी क्षति पहुंची है।
मार्ग पहले से अधिक घातक हो गए हैं। इस ऊहापोह के बीच दिसंबर 2021 में पूरी होने वाली परियोजना के पूर्ण निर्माण पर अभी सवालिया निशान है। न्यायालय के आदेश के चलते परियोजना में चौड़ीकरण का कार्य बंद है। आठ सितंबर से पूर्व स्वीकृत कार्यों पर काम चल रहा है।
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परियोजना का 24 फीसदी काम ही पूरा
चारधाम सड़क परियोजना का अभी 24 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। 889 किमी लंबी इस परियोजना के लिए 823.704 किमी लंबाई पर 53 कार्य होने हैं। इनमें से 670.414 किमी के 40 कार्यों की स्वीकृति हो चुकी है।
153 किमी के 13 कार्यों की मंजूरी लटकी
परियोजना के 153 किमी लंबाई के 13 कार्यों की मंजूरी प्राप्त नहीं हुई है। इसमें भागीरथी इको सेंसिटिव जोन का 87.73 किमी सड़क निर्माण का हिस्सा सबसे अहम है। इसके अलावा जोशीमठ, लामबगड़ से बेनाकुली, पिथौरागढ़, लोहाघाट, ऋषिकेश व चंपावत बाईपास की मंजूरी नहीं हुई है। ओजरी स्लाइड जोन और खाट स्लाइड जोन के कार्य भी लटके हैं।
परियोजना की यह है प्रगति:
645 किमी मार्ग पर कार्य
564.66 किमी चौड़ीकरण का कार्य
377.39 किमी पर रिटेनिंग व ब्रेस्ट वाल का काम
262 किमी पर क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं
821 किमी में वन लंबाई पर वन भूमि हस्तांतरण होना है
601 किमी में भूमि हस्तांतरण की मंजूरी मिल चुकी है
86.15 प्रतितश लंबाई में नाप भूमि में अधिग्रहण पूरा हो चुका है
714.45 करोड़ में 579.49 करोड़ का मुआवजा बांटा गया है
परियोजना के पक्ष में तर्क
-उत्तराखंड के चारधाम 12 महीने सड़क मार्ग से जुड़ेंगे
-सेना का साजो-सामान सरहद तक ले जाना सहज होगा
-यात्रा करना आसान होगा और समय की बचत होगी
-राज्य की अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा, यात्रा-पर्यटन को मजबूती मिलेगी
परियोजना के विरोध में तर्क
- पर्यावरणीय लिहाज से नाजुक हिमालय में भारी निर्माण कार्य बेहद संवेदनशील है
-परियोजना बनाने के लिए हजारों पेड़ों की बलि ली जा रही है
-मार्ग चौड़ीकरण के कार्य से भूस्खलन का खतरा बढ़ रहा है
-लाखों टन मिट्टी नदी में बहकर मैदानों में जा रही है
इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों को फोकस करना होगा
पर्यावरण के संबंध में हम इस बात को बहुत पहले से कह रहे हैं। सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी) के नाम पर उत्तराखंड देश को बहुत कुछ दे रहा है। यह पूरे देश की आवश्यकता है, यह बात सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने भी कह दी है। जीडीपी के चार क्षेत्रों में कृषि, उद्योग, अवस्थापना और सेवा में जीईपी को भी समाहित करना होगा। इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों को फोकस करते हुए आगे बढ़ना होगा।
- पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, पर्यावरणविद्
हिमालय की भौगोलिक संरचना के अनुरूप विकास होना चाहिए। जब जगह नहीं है तो चौड़ी सड़क क्यों बना रहे हैं। परियोजना के निर्माण से मिट्टी और पानी की सबसे अधिक बर्बादी हुई है। परियोजना में लाखों पेड़ कटे हैं। एक बार जल, जंगल और जमीन की क्षति का ऑडिट तो होना ही चाहिए।
- सुरेश भाई, पर्यावरण कार्यकर्ता
मौजूदा समय में देश की सरहदों तक सड़क सहित तमाम इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना बहुत जरूरी है। पड़ोसी देश लगातार सीमा तक अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूर कर रहा है। हाल ही में कई ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो चुका है। सीमा तक सभी सड़कों को अपग्रेड होना चाहिए। जिससे कि जरुरत पड़ने पर तत्काल हमारी सेना टैंक सहित अन्य हथियारों के साथ सीमा तक पहुंच सकें। पर्यावरण तभी सुरक्षित रहेगा जब देश सुरक्षित रहेगा।
-ले. जनरल गंभीर सिंह नेगी (सेनि)
पर्यावरण के नाम पर देश की सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला जा सकता। हम सुरक्षित रहेंगे तो पर्यावरण बचाने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं। पड़ोसी देश खासकर चीन हमारे देश पर टेढ़ी नजर लगाए हुआ है। देश की सीमाओं तक अपना इंफ्रास्ट्रक्चर लगातार मजबूत कर रहा है। यह समय की मांग है कि हम भी सीमाओं तक अपना इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करें, ताकि दुश्मन की किसी गलत हरकत का जवाब तुरंत दिया जा सके। इसलिए ऑलवेदर रोड सहित अन्य सड़कों को पर्यावरण के नाम पर रोड़े अटकाना देश की सुरक्षा के लिहाज ठीक नहीं है।
- ले. जनरल राम सिंह प्रधान (सेनि)