उत्तराखंड में बेंत से बढ़ेगा रोजगार, छह प्रजातियों को संरक्षित करने में जुटे वैज्ञानिक
राज्य में बेंत का अधिक से अधिक उत्पादन करने के साथ ही लोगों को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मुहैया हो सके, इसके लिए राज्य वन अनुसंधान शाखा के वैज्ञानिकों की टीम कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्र में पाए जाने वाले बेंत की कई प्रजातियों को संरक्षित करने में जुट गए हैं।
संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक फिलहाल पहले चरण में छह प्रजातियों को चिह्नित किया गया है और उनके संरक्षण की योजना बनाई गई है।
बेंत की जिन प्रजातियों को चिह्नित किया गया है वे चंपावत, हल्द्वानी जैसे इलाकों में नदियों के किनारे पाई जाती हैं। वन अनुसंधान शाखा के निदेशक एवं मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि बेंत की जिन प्रजातियों को चिह्नित किया गया है उनकी मैपिंग भी कराई जा रही है।
दूसरे राज्यों से मंगाई जाएंगी कई प्रजातियां
मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक संजीव चतुर्वेदी का कहना है कि मेघालय, सिक्किम, असम जैसे दक्षिण पूर्व पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश जैसे दक्षिण भारत के राज्यों में पाए जाने वाली बेंत की कई प्रजातियों को उत्तराखंड लाया जाएगा।
बेंत की इन प्रजातियों को संरक्षित करने के साथ ही इन्हें जंगलों में लगाने के साथ ही लोगों को भी निजी जमीनों पर लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बेंत से बने फर्नीचर की है मांग
मुख्य वन संरक्षक संजय चतुर्वेदी का कहना है कि बेंत से बने फर्नीचर का देश में करोड़ों रुपये का कारोबार है। बेंत से आकर्षक कुर्सी, मेज, सोफा बनाने के साथ ही अन्य फर्नीचर बनाये जाते हैं, जो टिकाऊ और सस्ते होते हैं।