उत्तराखंड: स्वामी यतीश्वरानंद की बढ़ी ताकत, खेमों में बंटी भाजपा असहज
स्वामी राज्यमंत्री से अब कैबिनेट मंत्री बने हैं। स्वामी के नवनियुक्त मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के करीबी रिश्ते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
2017 में हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को हराकर दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले स्वामी यतीश्वरानंद की पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट में न केवल वापसी हुई है, बल्कि कद बढ़ा है।
स्वामी की बढ़ती ताकत से कांग्रेस के पूर्व सीएम हरीश रावत ही नहीं बल्कि भाजपाई भी खुद को असहज महसूस करने लगे हैं। हरिद्वार में भाजपा कई खेमों में बंटी है। जबकि हरीश रावत 2022 के चुनाव के लिए हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस के लिए सुरक्षित सीट मानकर सक्रिय रहे हैं।
उत्तराखंड: सरकार ने मंत्रियों को बांटे जिलों के प्रभार, जल्द होगा विभागों का बंटवारा
स्वामी यतीश्वरानंद लगातार दूसरी बार विधायक हैं। 2017 के चुनाव में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को हराकर स्वामी प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में सुर्खियों में आए। हरीश रावत का प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति में बड़ा कद है। तब हरीश रावत को 32645 वोट मिले थे। जबकि स्वामी यतीश्वरानंद को 44872 वोट मिले। 12227 वोट से जीत दर्ज करने के बाद भी स्वामी यतीश्वरानंद को त्रिवेंद्र रावत के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
इसके पीछे भी भाजपा की अंदरूनी खेमेबाजी रही। स्वामी इस टीस को भूला नहीं पाए और गाहे बगाहे उनका दर्द भी झलकता रहा है। स्वामी यतीश्वरानंद के त्रिवेंद्र रावत मंत्रिमंडल में शामिल न होना और खेमेबाजी में बंटी भाजपा हरीश रावत के लिए मुफीद था। इन सबके अपने अपने राजनीति हित जुड़े थे। खेमों में बंटे भाजपाई स्वामी की ताकतवर होना नहीं देखना चाहते थे, जबकि हरदा हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का मोह नहीं छोड़ पा रहे थे।
मतदाताओं में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर
इस विधानसभा सीट पर करीब सवा लाख मतदाताओं में सर्वाधिक मुस्लिम वोटर हैं। 2017 के चुनाव में भाजपा को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला। इसकी वजह चुनाव में मोदी की लहर थी। हरीश रावत ने भी अपनी हार के पीछे मोदी लहर ही माना और सक्रियता नहीं छोड़ी। किसी ने किसी बहाने वह हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता बनी रही।
10 मार्च को प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ। तीरथ रावत की कैबिनेट में स्वामी यतीश्वरानंद गन्ना राज्य मंत्री बने। सरकार के नेतृत्व परिवर्तन से भाजपा का एक धड़ा कमजोर पड़ गया। हरीश रावत की सक्रियता भी अचानक थम सी गई। हालांकि, इस अवधि में कोरोना का कहर भी रहा।
अचानक नेतृत्व परिवर्तन के साथ सरकार की बागडोर पुष्कर सिंह धामी के हाथों में आ गई। इससे स्वामी राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट बन गए। इससे खेमों में बंटे भाजपाई चित हो गए हैं। हालांकि, कद बढ़ने के साथ स्वामी यतीश्वरानंद की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। 2022 के शुरूआत में चुनाव होने हैं। स्वामी के पास वक्त कम और जनता के प्रति जवाबदेही अधिक है।