एलोपैथी विवाद : बाबा रामदेव के बयान पर बालकृष्ण और आईएमए में खटपट, पढ़ें अब तक किसने क्या कहा
एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को लेकर दिए गए बयान के बाद से ही बाबा रामदेव चर्चा में हैं। वहीं, अब मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को आईएमए ने बाबा के खिलाफ 'कार्रवाई' करने को लेकर अपने अडिग रुख का परिचय देते हुए पीएम मोदी को पत्र तक लिखा दिया। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में सबकुछ...
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विस्तार
कोरोना काल में एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति को लेकर दिए गए योगगुरु बाबा रामदेव के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने बाबा रामदेव के बयान पर कड़ा विरोध जताया है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बाबा के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।
हालांकि विवाद बढ़ा तो बाबा ने तुरंत सफाई भी दे डाली, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को तल्ख पत्र लिख उनकी सफाई को नाकाफी बताकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। जिसके बाद बाबा ने अपना बयान वापस तो ले लिया, लेकिन अगले ही दिन आईएमए पर एलोपैथी से संबंधित 25 सवालों का गोला दाग दिया। इस पर आईएमए ने एलोपैथी को लेकर बाबा के ज्ञान पर तो सवाल उठाए ही साथ ही सार्वजनिक माफीनामा न होने की दशा में एक हजार करोड़ के मानहानि के दावे तक की धमकी दे डाली।
वहीं, इस बीच बाबा के शिष्य आचार्य बालकृष्ण के बयान ने मामले को अलग ही दिशा दे दी। उन्होंने कहा कि देश को ईसाई बनाने के षड्यंत्र के तहत बाबा को टारगेट किया जा रहा है। इस बीच गुरुवार को जहां एक ओर आईएमए की दिल्ली शाखा ने पीएम को पत्र लिखकर बाबा पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर डाली, वहीं दूसरी ओर बाबा का एक और वीडियो वायरल हो गया, जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि किसी का बाप भी उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकता। विस्तार से जानिए पूरा मामला...
क्या कहा था बाबा रामदेव ने
हाल ही में बाबा रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में उन्होंने एलोपैथी चिकित्सा पद्धति को 'मूखर्तापूर्ण विज्ञान ' बताया। स्वामी रामदेव ने कहा था कि एलोपैथिक दवाएं खाने से लाखों लोगों की मौत हुई है। डॉक्टर भी अपनी जान नहीं बचा पाए। उनके इस बयान के बाद ही देशभर के डॉक्टरों में रोष बढ़ गया।
डॉ. हर्षवर्धन के पत्र पर बयान लिया वापस
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हषवर्धन ने एक पत्र लिखकर योग गुरु रामदेव से कोरोना योद्धाओं के खिलाफ की गई 'आपत्तिजनक टिप्पणी' को वापस लेने के लिए कहा था। केंद्रीय मंत्री ने लिखा था कि योग गुरु रामदेव के वक्तव्य ने कोरोना योद्धाओं का निरादर कर, देशभर की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है। वे अपना बयान वापस लें। इसके बाद बाबा रामदेव ने उनके पत्र का जवाब देते हुए अपने बयान पर खेद व्यक्त किया था। उन्होंने ट्वीटर पर ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखे पत्र में कहा था 'माननीय श्री डॉ. हर्षवर्धन जी, आपका पत्र प्राप्त हुआ। उसके संदर्भ में चिकित्सा पद्दतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापस लेता हूं।'
योग गुरु रामदेव के वक्तव्य ने कोरोना योद्धाओं का निरादर कर, देशभर की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। मैंने उन्हें पत्र लिखकर अपना आपत्तिजनक वक्तव्य वापस लेने को कहा है: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन pic.twitter.com/ybzulFchYr
— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 23, 2021
माननीय श्री @drharshvardhan जी आपका पत्र प्राप्त हुआ,
— स्वामी रामदेव (@yogrishiramdev) May 23, 2021
उसके संदर्भ में चिकित्सा पद्दतियों के संघर्ष के इस पूरे विवाद को खेदपूर्वक विराम देते हुए मैं अपना वक्तव्य वापिस लेता हूँ और यह पत्र आपको संप्रेषित कर रहा हूं- pic.twitter.com/jEAr59VtEe
बाबा ने एलोपैथी पर पूछे 25 सवाल
विवादित बयान के बाद बैकफुट पर आते ही बाबा रामदेव ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और फार्मा कंपनियों को खुला पत्र जारी किया था। पत्र में उन्होंने अलग-अलग बीमारियों के स्थायी इलाज से जुड़े 25 सवाल पूछे। बाबा रामदेव ने खुला पत्र अपने ट्वीटर एकाउंट पर जारी किया। जिसके बाद यह खूब वायरल भी हुआ।
मैं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व फार्मा कंपनियों से विनम्रता के साथ सीधे 25 सवाल पूछता हूँ- pic.twitter.com/ATVKlDc9tl
— स्वामी रामदेव (@yogrishiramdev) May 24, 2021
बचाव में उतरे आचार्य बालकृष्ण
बाबा रामदेव के बयान के बाद आचार्य बालकृष्ण भी उनके बचाव में उतर आए थे। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि बाबा रामदेव की मंशा एलोपैथिक दवाओं पर टिप्पणी करने की नहीं थी। वो सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज पढ़ रहे थे। वहीं, उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट भी की जिसके बाद लोगों ने इसकी काफी निंदा भी की। आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीटर पर लिखा कि पूरे देश को क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने के षड्यंत्र के तहत योग ऋषि रामदेव को बदनाम किया जा रहा है। देशवासियों, अब तो गहरी नींद से जागो। नहीं तो आने वाली पीढ़ियां तुम्हें माफ नहीं करेंगी। बालकृष्ण के इस ट्वीट पर कांग्रेस ने भी एतराज जताया।
पूरे देश को #Christianity में convert करने के षड्यंत्र के तहत, @yogrishiramdev जी को target करके #योग एवं #आयुर्वेद को बदनाम किया जा रहा है। देशवासियों, अब तो गहरी नींद से जागो🙏 नहीं तो आने वाली पीढ़ियां तुम्हें माफ नहीं करेंगी। pic.twitter.com/XADqXiGJIT
— Acharya Balkrishna (@Ach_Balkrishna) May 24, 2021
आईएमए ने भेजा हजार करोड़ का नोटिस
बाबा रामदेव के बयान के बाद आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की उत्तराखंड शाखा ने भी मोर्चा खोल दिया। बाबा रामदेव की ओर से 25 सवाल जारी किए जाने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उन्हें लीगल नोटिस जारी किया। एसोसिएशन ने कहा कि बाबा रामदेव एलोपैथी का ‘ए’ तक नहीं जानते। हम उनके सवालों के जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन पहले वे अपनी योग्यता तो बताएं। उन्होंने कहा कि अगर बाबा 15 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगेंगे तो उनके खिलाफ एक हजार करोड़ रुपये का मानहानि का दावा किया जाएगा।
आईएमए ने की देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की मुख्य शाखा ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा। इस पत्र में आईएमए ने कहा है कि पतंजलि के मालिक रामदेव की ओर से टीकाकरण को लेकर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं के प्रसार को रोका जाना चाहिए। आईएमए ने कहा कि एक वीडियो में बाबा रामदेव ने दावा किया कि वैक्सीन की दोनों खुराकें लेने के बाद भी 10 हजार से ज्यादा चिकित्सक और लाखों लोगों की मौत हुई है। आईएमए ने रामदेव के खिलाफ देशद्रोह के आरोपों के तहत कार्रवाई की मांग की है।
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