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अनुपमा गुलाटी हत्याकांड: आजीवन कारावास की सजा काट रहे राजेश गुलाटी की जमानत याचिका खारिज
Wed, 28 Jul 2021 04:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 28 Jul 2021 04:26 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
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राजेश गुलाटी
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
विस्तार
देहरादून के चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे उसके पति राजेश गुलाटी की जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि उसने जघन्य अपराध किया था।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता राजेश गुलाटी ने याचिका में कहा कि वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और पिछले 11 वर्षों से जेल में है। जेल में उसका आचरण अच्छा पाया गया है। उसे अच्छे आचरण का प्रमाणपत्र भी जेल प्रशासन ने दिया है। इस आधार पर उसे जमानत दी जाए।
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इसका विरोध करते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि दोषी के खिलाफ निचली अदालत में 42 गवाह पेश किए गए थे। सभी ने इस हत्या को निर्मम बताया था और जो आरोप राजेश पर लगाए गए थे वे सही पाए गए थे।
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यह था मामला
राजेश गुलाटी ने अपनी पत्नी अनुपमा गुलाटी की 17 अक्तूबर 2010 को निर्मम हत्या कर दी थी और उसने शव के 72 टुकड़े कर डीप फ्रिज में डाल दिए थे। 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई दिल्ली से देहरादून आया तो हत्या का खुलासा हुआ।
इसके बाद 1 सितंबर 2017 को देहरादून कोर्ट ने राजेश गुलाटी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उस पर 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसमें से 70 हजार रुपये राजकीय कोष में जमा करने और शेष राशि उसके बच्चों के बालिग होने तक बैंक में जमा कराने के लिए कहा गया था।
कोर्ट ने इस घटना को जघन्य अपराध की श्रेणी में माना था। राजेश गुलाटी ने 1999 में अनुपमा से लव मैरिज की थी। राजेश गुलाटी ने निचली अदालत के इस आदेश को 2017 में हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।