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आंगनबाड़ी केंद्रों का बुरा हाल: मकान मालिकों के तानें ने सुनने पड़ें इसलिए घर पर चला रहीं केंद्र

Sun, 10 Oct 2021 10:58 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 10 Oct 2021 10:58 AM IST
सार

आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की सरकार की योजना है, जिससे निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉडयूल की बराबरी की जा सके, लेकिन वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों की जो स्थिति है वह कुछ और ही बयां कर रही है।

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uttarakhand news: Anganwadi center capital Dehradun in bad condition
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा पॉल अपने घर में चला रही केंद्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किराये की परेशानी और मकान मालिकों के ताने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रोज झेलने पड़ते हैं। किराया समय पर नहीं मिलता और जो धनराशि तय की भी गई उसमें अच्छी जगह पर बेहतर भवन किराये पर लिया जाना संभव नहीं है।

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ऐसे में कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घरों में ही आंगनबाड़ी केंद्र चला रही हैं। उनका कहना है कि सरकार और विभाग को क्षेत्र के हिसाब से आंगनबाड़ी केंद्र के लिए किराये का भुगतान करना चाहिए। 
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जो पैसा भवन किराये के लिए दिया जाता, उसमें भवन मिलना नामुमकिन
आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी के रूप में संचालित करने की सरकार की योजना है, जिससे निजी स्कूलों के प्ले ग्रुप मॉडयूल की बराबरी की जा सके, लेकिन वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों की जो स्थिति है वह कुछ और ही बयां कर रही है। बंजारावाला क्षेत्र में तीन आंगनबाड़ी केंद्र (बंजारावाला 6, 7 और 8) ऐसे हैं, जिनका संचालन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घरों में ही कर रही हैं।
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वहीं, पटेलनगर सत्तोवाला घाटी में भी घर पर ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा केंद्र का संचालन किया जा रहा है। बंजारावाला छह में पांच साल से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ऊषा पॉल अपने घर में केंद्र चला रही हैं। बताया कि जो पैसा भवन किराये के लिए दिया जाता है, उसमें भवन मिलना मुमकिन नहीं है। मकान मालिक तय समय पर किराया मांगते है। ऐसे में मैंने घर के ही एक कमरे में केंद्र शुरू किया। यहां 105 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि पढ़ने वाले 12 बच्चे हैं। 


वहीं, बंदरवाली गली पथरीबाग में जिस भवन में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन किया जा रहा है, वहां 10 महीने से किराया नहीं दिया गया था। कुछ दिन पहले ही मकान मालिक को किराया दिया गया वो भी आधा। इसके अलावा पटेलनगर सत्तोवाली घाटी में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने घर पर ही केंद्र चलाती हैं। यहां 22 बच्चे पंजीकृत है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कहना है कि इतने कम बजट में क्षेत्र में भवन मिलना मुश्किल है।

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