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उत्तराखंड: देहरादून में खतरनाक एस्परजिलस फंगस ने दी दस्तक, इम्यूनिटी कम होने पर दिखा रहा घातक रूप

Mon, 07 Jun 2021 09:31 AM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 07 Jun 2021 09:31 AM IST
सार

विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक, ब्लैक फंगस की तरह ही इसका संक्रमण उन मरीजों में देखने को मिला है जो कोरोना की दूसरी लहर से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ हुए हैं।

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Uttarakhand News: After Black Fungus Dangerous Aspergillus Fungus patients Found in dehradun
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

ब्लैक फंगस के बाद अब कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों में एस्परजिलस का संक्रमण देखने को मिला है। एस्परजिलस फंगस से होने वाली बीमारी के 20 पीड़ित दून के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। मरीज की इम्यूनिटी कम होना इसकी वजह बताई जा रही है। 

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महंत इंदिरेश अस्पताल पटेलनगर के वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. जगदीश रावत ने बताया कि आईसीयू में भर्ती 100 में से 10 मरीजों में यह फंगस दिखा है। कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में यह ज्यादा घातक देखा जा रहा है। यह फेफड़ों को ज्यादा संक्रमित करता है। ब्लैक फंगस की तरह ही इस संक्रमण में भी एम्फोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन दिए जाते हैं। इसकी अन्य दवाएं भी हैं।
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एम्फोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन की कमी की वजह से फिलहाल दूसरी दवाओं का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी महाराष्ट्र और गुजरात में इस तरह के केस ज्यादा आए हैं। नमी अधिक होना भी इसका एक कारण है।
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फेफड़े हुए खराब तो संक्रमण की आशंका अधिक
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि जिन मरीजों के फेफड़ों में पहले से संक्रमण या खराबी होती है, उनमें एस्परजिलस फंगस के संक्रमण की आशंका अधिक होती है। पुरानी टीबी, फेफड़ों में कैविटी के अंदर बॉल बन जाने, एलर्जी होने से यह फंगस कई बार फेफड़े में अंदर तक पहुंच जाता है। कोरोना के बाद भी कुछ मामलों में यह देखा गया है, लेकिन कोरोना से इसका क्या संबंध है यह अभी शोध का विषय है।

फेफड़ों के साथ अन्य अंगों में फैला तो होगा घातक

जिस तरह से ब्लैक फंगस आंख, नाक, कान, गले और अन्य अंगों में फैल रहा है अगर यह भी फेफड़ों से इतर दूसरे अंगों में फैलने लगेगा तो अत्यंत घातक हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के इलाज की टेबलेट और इंजेक्शन दवाएं फिलहाल उपलब्ध हैं। 

घबराएं नहीं. सभी जरूरी जांचें कराएं
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. कुमार जी. कॉल का कहना है कि अगर किसी भी तरह के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर द्वारा बताई गई सभी जांच आवश्यक तौर पर करा लें। जब तक सभी रिपोर्ट सामान्य न आ जाएं और डॉक्टर सलाह न दें तब तक अस्पताल में ही इलाज कराएं।

अस्पताल से घर पहुंचे, 10 मिनट में फोन आया फिर भर्ती होना पड़ेगा
कोरोना से संक्रमित हुए एक युवक के चेहरे और आंखों में सूजन आने पर उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज मानकर उन्हें भर्ती कर लिया। शनिवार को विभिन्न जांच में ब्लैक फंगस की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इस बीच डॉक्टर के पास मरीज की एक अन्य जांच रिपोर्ट आई। पता लगा कि युवक को एस्परजिलस नामक फंगस इंफेक्शन है। पीड़ित अस्पताल से घर पहुंचा ही था कि 10 मिनट बाद अस्पताल से फोन आया कि उन्हें फिर से भर्ती होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में समुचित इलाज मिल रहा है और उन्हें कोई दिक्कत नहीं हो रही है। 

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