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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Uttarakhand News 48 Locations in Chamoli Uttarkashi and Pithoragarh Identified as Sensitive to Debris Flow

Uttarakhand: चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ में 48 जगह मलबा बहाव को लेकर संवेदनशील, निगरानी के दिए निर्देश

Tue, 05 May 2026 10:52 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Tue, 05 May 2026 10:52 AM IST
सार

चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ में 48 जगह मलबा बहाव को लेकर संवेदनशील बताया गया  है। यह जल निकासी मार्गों के पास मौजूद है। मुख्य सचिव ने सर्वेक्षण कर इनकी निगरानी के  निर्देश दिए हैं।

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Uttarakhand News 48 Locations in Chamoli Uttarkashi and Pithoragarh Identified as Sensitive to Debris Flow
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और चमोली में 48 स्थान है, जो कि मलबा बहाव को लेकर संवेदनशील है। इन स्थानों के पास जल निकासी मार्ग है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने संबंधित जगहों के सर्वेक्षण, निगरानी और आवश्यक निवारक कार्य के निर्देश दिए हैं।

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मुख्य सचिव ने सचिवालय में आयोजित बैठक में अधिकारियों को डिब्रिस फ्लो (मलबा बहाव) से संबंधित जोखिम आकलन पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। बताया गया कि चमोली, उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपदों में कुल 48 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। ये सभी स्थान मुख्यतः जल निकासी मार्गों (ड्रेनेज चैनल) के आसपास स्थित हैं, जिन्हें जोखिम के आधार पर उच्च, मध्यम एवं निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, ताकि प्राथमिकता के अनुसार कार्य किया जा सके।

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इस कार्य के लिए विभिन्न संस्थानों को शामिल करते हुए एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है, जिसमें उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान तथा उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र शामिल हैं।
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मुख्य सचिव ने बर्द्धन ने चिह्नित संवेदनशील स्थलों पर प्राथमिकता के आधार पर सर्वेक्षण, निगरानी एवं आवश्यक निवारक कार्य करने को कहा। इसके लिए जिला प्रशासन व तकनीकी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान निदेशक डॉ. वीके. गहलोत, डॉ. के. लुइरेई, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. मनीष मेहता समेत अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल थे।

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