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Uttarakhand News : अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 43 हजार छात्रों को मिलेगा रुका वजीफा

Sat, 06 Feb 2021 02:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 06 Feb 2021 02:53 PM IST
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uttarakhand news : 43,000 students of scheduled castes and other backward classes will get scholarship
रुपये - फोटो : pixabay

समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 42634 छात्रों को पिछले वर्षों से रुकी छात्रवृत्ति जारी हो सकेगी। सचिव समाज कल्याण के निर्देश पर लंबित छात्रवृत्ति की आठ करोड़ 15 लाख 34 हजार रुपये की धनराशि जारी करने के आदेश हो गए हैं। अब निदेशक समाज कल्याण छात्रवृत्ति की धनराशि का वितरण कर सकेंगे। 

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पूर्व दशम छात्रवृत्ति योजना के तहत अन्य पिछड़ी जाति के 6000 छात्रों को वर्ष 2018-19 में और 14142 छात्रों को वर्ष 2019-20 छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं हो सका। इसी तरह कक्षा नौ से 10 की पूर्व दशम छात्रवृत्ति योजना के अनुसूचित जाति के 22,492 छात्रों को 2018-19 व 2019-20 में छात्रवृत्ति नहीं मिली। छात्रवृत्ति के लिए कैबिनेट के साथ ही वित्त विभाग की मंजूरी मिल चुकी है।
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राज्य विश्वविद्यालयों में लागू होगी डीजी लॉकर व्यवस्था : धन सिंह

राज्य विश्वविद्यालयों में शीघ्र ही डीजी लॉकर व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे छात्रों को घर बैठे अंकपत्र और प्रमाणपत्र उपलब्ध हो सकेंगे। उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने यह जानकारी दून विश्वविद्यालय में निजी शिक्षण संस्थानों के साथ आयोजित बैठक में दी। 
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उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि छात्र संख्या को देखते हुए इस व्यवस्था को सबसे पहले श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से सबसे अधिक निजी शिक्षण संस्थान संबद्ध हैं। उन्होंने श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति को इस पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। बैठक में राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश के सभी उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले निजी शिक्षण संस्थान एक-एक गांव को गोद लेकर सामाजिक, शैक्षणिक, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाएंगे। 

उन्होंने विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक नैक ग्रेडिंग का मूल्यांकन कराने को कहा। इससे नई शिक्षा नीति के तहत इन्हें सरकार की ओर से स्वायत्ता प्रदान की जा सकेगी। बैठक में निजी संस्थान के संचालकों ने विश्वविद्यालयों से संबद्ध पाठ्यक्रमों को वर्ष 2020 तक मान्यता दिलाने, विभिन्न पाठ्यक्रमों की प्रतिभूति राशि (एफडीआर) कम करवाने की मांग की।

इसके अलावा निजी शिक्षण संस्थानों ने अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति की धनराशि उपलब्ध कराने की मांग की। बैठक में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में सभी निजी शिक्षण संस्थान एक ही विश्वविद्यालय से संबद्ध रहेंगे। 


बैठक में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीपी ध्यानी, दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, रूसा के सलाहकार प्रो. एमएसएम रावत, प्रो. केडी पुरोहित, डॉ. एचसी पुरोहित, मंगल सिंह मंद्रवाल, दरियाब सिंह, हरीश अरोड़ा, मोहित अग्रवाल, सचिन सिंघल, निशा वर्मा, प्रतीक्षा जुयाल, अनिल तोमर, ललित जोशी, शूरवीर चौहान आदि मौजूद रहे। 

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