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Uttarakhand: प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पर संकट; 2959 स्कूल एकल शिक्षकों के भरोसे, छात्रों की संख्या घटी

Tue, 30 Jun 2026 11:47 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Tue, 30 Jun 2026 11:47 PM IST
सार

सरकारी स्कूलों से घटती छात्र संख्या पर चिंता जताई गई है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च प्राथमिक से माध्यमिक स्तर पर पहुंचते-पहुंचते 10 में से चार बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं।

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Uttarakhand News 2959 schools in the state rely on a single teacher 38608 students are enrolled
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भरोसे के संकट से गुजर रही है, यही वजह है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से घटती जा रही है। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में 2959 स्कूल ऐसे हैं जो एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। वहीं, 39 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें 33 शिक्षक दर्शाए गए हैं पर छात्र एक भी नहीं है।

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नीति आयोग की इस रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों से घटती छात्र संख्या पर चिंता जताई गई है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में उच्च प्राथमिक से माध्यमिक स्तर पर पहुंचते-पहुंचते 10 में से चार बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह बताई गई है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तरों के विपरीत माध्यमिक स्तर आरटीई के तहत नहीं आता। जो केवल 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है।
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परिणामस्वरूप कक्षा आठवीं के बाद पढ़ाई जारी रखने का वित्तीय बोझ, ट्यूशन, यूनिफॉर्म, किताबें और परिवहन आदि का खर्च परिवारों पर पड़ता है। जिससे अक्सर विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ता है।
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वर्तमान ढांचे को बदलने की सिफारिश
नीति आयोग ने वर्तमान ढांचे को पूरी तरह से बदलने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों की वर्तमान व्यवस्था पिरामिड जैसी है। जिसमें निचले स्तर पर कई प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, लेकिन माध्यमिक स्तर के स्कूलों की संख्या कम है। आयोग ने इसे सिलिंडर मॉडल में बदलने की सिफारिश की है। जहां जितने बच्चे प्राथमिक में आएं, उतने ही 12 वीं पास करके निकलें।

कक्षा एक से 12वीं तक की पढ़ाई एक छत के नीचे
नीति आयोग ने रिपोर्ट में एकीकृत स्कूल परिसर बनाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा एक से 12 वीं तक की पढ़ाई एक ही छत के नीचे हो। जिससे छात्रों को स्कूल बदलने की दिक्कत नहीं होगी, इससे ड्रॉपआउट को कम किया जा सकेगा।

सरकारी स्कूलों से पलायन
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में वर्ष 2005-06 में जहां 71.13 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे थे, वहीं, 2024-25 तक यह आंकड़ा घटकर 49.24 रह गया है। पहली बार देश के आधे से अधिक बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जो सरकारी शिक्षा के प्रति घटते भरोसे को दर्शाता है।

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