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Uttarakhand News: आश्रय गृह से निकले 18 युवक-युवतियों बनेंगे आत्मनिर्भर, प्रदेश से पहला बैच होगा तैयार
Fri, 22 Aug 2025 02:30 PM IST
रेनू सकलानी
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Fri, 22 Aug 2025 02:30 PM IST
सार
आश्रय गृह से निकले 18 युवक-युवतियों को प्रशिक्षण के बाद नौकरी मिलेगी। उत्तराखंड से पहला बैच तैयार होगा। हरिद्वार से प्रशिक्षण की शुरुआत होगी।
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सीएम धामी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
राज्य में बाल सुधार गृह और अनाथालय से निकलने वाले युवक-युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल हुई है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने ऐसे 18 युवाओं का पहला बैच तैयार किया है जिन्हें नोएडा स्थित हल्दीराम स्किल अकादमी में तीन महीने का प्रशिक्षण देने के बाद प्रतिमाह लगभग 19 हजार रुपये के शुरुआती वेतन पर नौकरी दी जाएगी।
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इस बैच के लिए नोएडा में मल्टी क्यूजीन कोर्स का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण की शुरुआत शुक्रवार को हरिद्वार में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के आयोजन से होगी। जहां सभी 18 युवाओं को विशेष सत्र में मार्गदर्शन दिया जाएगा। 25 अगस्त को प्रशिक्षण के लिए नोएडा भेजा जाएगा। महिला व बाल कल्याण निदेशक बंशी लाल राणा ने बताया कि इस कार्यक्रम में 12 ऐसे युवा शामिल हैं जो बाल सुधारगृह में 18 वर्ष की आयु पूर्ण करके निकले हैं।
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इनके अलावा छह युवतियां अनाथ और निराश्रित श्रेणी की हैं। ये सभी देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिलों से हैं। हरिद्वार से सबसे ज्यादा 13 युवक-युवतियां शामिल हैं इसलिए हरिद्वार से कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है।
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तीन महीने का कोर्स पूरा करने के बाद विभिन्न नौकरी पर नियुक्त किया जाएगा
आवासीय प्रशिक्षण के बाद नौकरी पक्की मुख्य परिवीक्षा अधिकारी अंजना गुप्ता ने बताया कि राज्य से यह पहला बैच जाएगा। इन्हें प्रशिक्षण के दौरान आवास, भोजन, साफ-सफाई की सामग्री, परिवहन, यूनिफॉर्म और मोबाइल फोन जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। तीन महीने का कोर्स पूरा करने के बाद हल्दीराम के विभिन्न आउटलेट्स में नौकरी पर नियुक्त किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद नौकरी के पहले महीने में आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
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आउटलेट्स में शुरुआती वेतन 18,902 रुपये होगा। इस कार्यक्रम के जरिये सुधार गृह और आश्रय गृह से निकले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने व उन्हें समाज का एक सम्मानित हिस्सा बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल की जा रही है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन किशोरों को पुनर्वासित करने पर केंद्रित है जो विधि विवादित श्रेणी से आते हैं ताकि उन्हें एक नया और सकारात्मक जीवन मिल सके। - रेखा आर्या, मंत्री, महिला एवं बाल कल्याण