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उत्तराखंड : 2018 से 2020 तक दर्ज हुए 1539 गुमशुदगी के मामले, तीन साल से गायब हैं 115 नाबालिग
Fri, 25 Jun 2021 06:54 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 25 Jun 2021 06:54 PM IST
सार
अधिकारियों के मुताबिक इन मुकदमों की जांच को प्राथमिकता पर रखा जाता है। यही कारण है कि इनके खुलासे 80 फीसदी से भी अधिक हैं, लेकिन वर्तमान में जो नाबालिग गायब हैं उनकी बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं।
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विस्तार
तीन साल से प्रदेश के 115 नाबालिग गायब हैं। गायब होने वालों में ज्यादा संख्या बच्चियों और किशोरियों की है। पुलिस हर साल दर्ज होने वाले अपहरण (नाबालिग के गायब होने पर) के मुकदमों में से 80 फीसदी का खुलासा भी कर देती है। मगर, गायब नाबालिगों की यह संख्या चिंता का सबब है।
पुलिस मुख्यालय के मुताबिक वर्ष 2018, 2019 और 2020 में कुल 1539 नाबालिगों के अपहरण के मुकदमे प्रदेशभर में दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस ने 1424 नाबालिगों को बरामद कर लिया है। बावजूद इसके 115 नाबालिग अब भी गायब हैं। इनमें से 61 लड़कियां और 54 लड़के शामिल हैं। दरअसल, नाबालिगों के गायब होने पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया जाता है।
इनके लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इनमें काफी हद तक पुलिस को सफलता भी मिलती है। वर्तमान में भी तैयारी की जा रही है कि एक बार फिर से अभियान शुरू किया जाए।
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घर के झगड़े होते हैं सबसे बड़ी वजह
पुलिस शुरूआत में इन मुकदमों में मानव तस्करी के दृष्टिकोण से ही जांच करती है। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के लिए यह राहत की बात है कि यहां पर ऐसा कोई गिरोह सक्रिय नहीं है। बावजूद इसके लगातार पुलिस की मानव तस्करी निरोधक यूनिट प्रयासरत रहती है। ज्यादातर नाबालिगों के घर से जाने की वजह पारिवारिक झगड़े या इससे मिलते जुलते कारण होते हैं। किशोर अवस्था वालों के साथ प्रेम प्रसंग के मामले भी जुड़े होते हैं।
इस साल भी 50 हैं लापता
इस साल 31 मई तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 92 बालक और 167 बालिकाएं गायब हुए थे। इनमें से क्रमश: 77 और 132 को बरामद किया जा चुका है। 15 बालक और 35 बालिकाएं इस साल भी लापता हैं। अधिकारियों के मुुताबिक बरामदगी के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड पुलिस 80 फीसदी से ज्यादा नाबालिगों को बरामद कर चुकी है। ज्यादातर के घर से जाने में कोई आपराधिक एंगल सामने नहीं आया है। जो नाबालिग गायब हैं उनकी बरामदगी के लिए भी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
- एडीजी अभिनव कुमार, प्रवक्ता, उत्तराखंड पुलिस
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पुलिस मुख्यालय के मुताबिक वर्ष 2018, 2019 और 2020 में कुल 1539 नाबालिगों के अपहरण के मुकदमे प्रदेशभर में दर्ज किए गए थे। इनमें से पुलिस ने 1424 नाबालिगों को बरामद कर लिया है। बावजूद इसके 115 नाबालिग अब भी गायब हैं। इनमें से 61 लड़कियां और 54 लड़के शामिल हैं। दरअसल, नाबालिगों के गायब होने पर अपहरण का मुकदमा दर्ज किया जाता है।
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इनके लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इनमें काफी हद तक पुलिस को सफलता भी मिलती है। वर्तमान में भी तैयारी की जा रही है कि एक बार फिर से अभियान शुरू किया जाए।
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घर के झगड़े होते हैं सबसे बड़ी वजह
पुलिस शुरूआत में इन मुकदमों में मानव तस्करी के दृष्टिकोण से ही जांच करती है। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के लिए यह राहत की बात है कि यहां पर ऐसा कोई गिरोह सक्रिय नहीं है। बावजूद इसके लगातार पुलिस की मानव तस्करी निरोधक यूनिट प्रयासरत रहती है। ज्यादातर नाबालिगों के घर से जाने की वजह पारिवारिक झगड़े या इससे मिलते जुलते कारण होते हैं। किशोर अवस्था वालों के साथ प्रेम प्रसंग के मामले भी जुड़े होते हैं।
इस साल भी 50 हैं लापता
इस साल 31 मई तक के आंकड़ों पर गौर करें तो 92 बालक और 167 बालिकाएं गायब हुए थे। इनमें से क्रमश: 77 और 132 को बरामद किया जा चुका है। 15 बालक और 35 बालिकाएं इस साल भी लापता हैं। अधिकारियों के मुुताबिक बरामदगी के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उत्तराखंड पुलिस 80 फीसदी से ज्यादा नाबालिगों को बरामद कर चुकी है। ज्यादातर के घर से जाने में कोई आपराधिक एंगल सामने नहीं आया है। जो नाबालिग गायब हैं उनकी बरामदगी के लिए भी प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
- एडीजी अभिनव कुमार, प्रवक्ता, उत्तराखंड पुलिस